पेपर लीक पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: संसद में कड़े कानूनों वाला ‘एंटी पेपर लीक बिल’ पेश; 10 साल की सजा, 10 करोड़ जुर्माना और 3 महीने में फैसला
नई दिल्ली: देशभर में नीट (NEET) सहित अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक छिड़ी जंग अब देश की संसद (Parliament) में पहुंच गई है। जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन और चौतरफा दबाव के बाद, मोदी सरकार (Modi Govt) ने पेपर लीक माफिया के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए संसद में नया और बेहद शक्तिशाली ‘एंटी पेपर लीक बिल’ (संशोधन विधेयक) पेश कर दिया है।
लोकसभा (Lok Sabha) में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह ऐतिहासिक बिल पेश किया। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर पूरी तरह लगाम लगाना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
राजनीति का समय नहीं, बहानेबाजी नहीं चलेगी: किरेन रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा:
“अब मुद्दे को भटकाने की कोशिश न हो। कांग्रेस और विपक्ष से अपील है कि बच्चों के भविष्य को लेकर सरकार जो रिफॉर्म (Reforms) लेकर आई है, उस पर चर्चा जरूरी है। ये राजनीति का समय नहीं है। किसी की बहानेबाजी अब नहीं चलेगी। छात्रों के लिए लाया गया बिल पास होगा, ये सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” पेपर लीक पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: संसद में कड़े कानूनों वाला ‘एंटी पेपर लीक बिल’ पेश; 10 साल की सजा, 10 करोड़ जुर्माना और 3 महीने में फैसला
‘एंटी पेपर लीक बिल’: पुराने कानून और नए संशोधन में क्या है अंतर? (कम्पैरिजन टेबल)
नया प्रस्तावित कानून पुराने 2024 के कानून की तुलना में कई गुना ज्यादा सख्त और समयबद्ध (Time-bound) है। आइए जानते हैं प्रमुख बदलाव:
| प्रावधान | पुराना कानून (2024) | नया संशोधन बिल (2026) |
| सजा | 3 से 5 साल | 5 से 10 साल |
| जुर्माना | ₹10 लाख | ₹10 करोड़ तक |
| जांच एजेंसी | सामान्य सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी | स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन होगा |
| जांच की समय सीमा | कोई समय सीमा तय नहीं | 2 महीने के भीतर जांच पूरी होगी |
| सुनवाई (Trial) | सामान्य अदालत में | मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी |
| फैसला (Judgement) | कोई समय सीमा तय नहीं | 3 महीने के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य |
| हाईकोर्ट में अपील | अपील का समय तय नहीं | 30 दिन में हाईकोर्ट में अपील कर सकेंगे |
| हाईकोर्ट का फैसला | कोई समय सीमा तय नहीं | 3 महीने में हाईकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा |
युवाओं से संवाद: पीएम मोदी ने हाई पावर टास्क फोर्स का किया गठन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार देश के युवाओं (GenZ) से संवाद कर रहे हैं। 23 और 24 जुलाई के वीडियो संदेशों के बाद, 26 जुलाई को उन्होंने हाई पावर टास्क फोर्स (High-Power Task Force) के गठन का ऐलान किया है।
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नंदन नीलेकणि करेंगे अगुवाई: इन्फोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय कमेटी सरकार को पेपर लीक रोकने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के तरीके सुझाएगी।
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टेक्नोलॉजी से ट्रांसपेरेंसी: पीएम मोदी ने कहा कि यह कमेटी बताएगी कि एग्जाम सिस्टम में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कैसे पारदर्शिता (Transparency) लाई जा सकती है और परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा मज़बूत किया जा सकता है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय में बड़ा बदलाव: प्रह्लाद जोशी को कमान, NTA पर ‘गाज’
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया। इसके बाद पीएम मोदी ने शिक्षा मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को सौंपी है।
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शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह पीएम मोदी की उम्मीदों को पूरा करने और एनईपी (NEP 2020) को तेजी से लागू करने की पूरी कोशिश करेंगे।
अब तक की बड़ी कार्रवाइयां (Actions Taken So Far)
सरकार ने पेपर लीक मामले में कड़ा एक्शन लेते हुए अब तक कई बड़े कदम उठाए हैं:
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NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस भी दर्ज किया जाएगा।
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दिल्ली पुलिस की STF: दिल्ली पुलिस ने देश की सभी प्रतिष्ठित परीक्षाओं (UPSC से NTA तक) में गड़बड़ी की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है।








