सूरत के कपड़ा बाजार पर ‘युद्ध’ की मार, रोज़ 100 करोड़ का नुकसान

सूरत के कपड़ा बाजार पर ‘युद्ध’ की मार, रोज़ 100 करोड़ का नुकसान

सूरत के कपड़ा बाजार पर ‘युद्ध’ की मार, रोज़ 100 करोड़ का नुकसान, गुजरात के प्रमुख टेक्सटाइल हब सूरत में मिडिल ईस्ट संकट का असर अब साफ दिखने लगा है। बढ़ती लागत और कच्चे माल की महंगाई ने कपड़ा उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। उद्योग से जुड़े संगठनों के मुताबिक, सूरत का टेक्सटाइल सेक्टर इस समय रोज़ाना करीब 90 से 100 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रहा है।

सूरत के कपड़ा बाजार पर ‘युद्ध’ की मार, रोज़ 100 करोड़ का नुकसान

फेडरेशन ऑफ गुजरात वीवर्स वेलफेयर एसोसिएशन और सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार, कई यूनिट्स ने अपने काम के घंटे 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे कर दिए हैं। वहीं, कुछ फैक्ट्रियों ने सप्ताह में 7 दिन की जगह 5 दिन ही उत्पादन करने का फैसला लिया है, जिससे कुल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ा है।

उद्योग से जुड़े नेताओं का कहना है कि कच्चे माल, खासकर मैन-मेड फाइबर और कोयले की कीमतों में 30–35% तक बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते बुनाई, प्रोसेसिंग और ट्रेडिंग—तीनों क्षेत्रों में 25–30% की गिरावट दर्ज की गई है।

संकट को मजदूरों की कमी ने और गंभीर बना दिया है। अनुमान के मुताबिक, करीब 35% श्रमिकों की कमी हो गई है और पिछले कुछ हफ्तों में 2,000 से ज्यादा प्रवासी मजदूर शहर छोड़ चुके हैं। गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती लागत ने इस पलायन को और तेज कर दिया।

उद्योग पहले रोजाना लगभग 7 करोड़ मीटर कपड़ा उत्पादन करता था, लेकिन अब यह घटकर लगभग आधा रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात सामान्य होने के बाद भी इंडस्ट्री को पूरी तरह पटरी पर लौटने में 2 से 3 महीने लग सकते हैं।

इस बीच, सरकार की ओर से कुछ राहत के संकेत भी मिले हैं। राज्य सरकार ने श्रमिकों के लिए एलपीजी सिलेंडर की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले शादी के सीजन में मांग बढ़ेगी, जिससे हालात में कुछ सुधार आ सकता है।

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