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निजी अस्पतालों को सुप्रीम झटका, इलाज के लिए शुल्क तय करने केंद्र को निर्देश

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नई दिल्ली। देश के निजी अस्पतालों को बड़ा झटका लगा है। देश भर के अस्‍पताल में इलाज के शुल्‍क को तय करने की बात कही है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को अगले 6 सप्ताह के भीतर मरीजों द्वारा भुगतान किए जाने वाले अस्पताल उपचार शुल्क को शीघ्रता से तय करने का निर्देश दिया है।

एक एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की खंडपीठ ने यह बात कही। इसमें कहा गया है कि ”हम भारत संघ के स्वास्थ्य विभाग के सचिव को निर्देश देते हैं कि वे राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों में अपने समकक्षों के साथ बैठक करें और सुनवाई की अगली तारीख (अगले छह सप्ताह में) तक एक ठोस प्रस्ताव लेकर आएं।”

40,000 से अधिक पंजीकृत अस्पताल

वर्तमान में देश में 40,000 से अधिक पंजीकृत अस्पताल हैं, जो अब नई प्रणाली में 30 करोड़ से अधिक की संख्या वाले सभी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीधारकों को कैशलेस सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं।

2010 में बने थे नियम

सरकार के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 में बनाए गए नियमों को 12 राज्य सरकारों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाया गया है और 2012 के नियमों के नियम 9 के प्रावधानों के मद्देनजर दरें तय की गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा तब तक निर्धारित नहीं किया जा सकता जब तक कि राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों से कोई प्रतिक्रिया न हो।

राज्‍यों से नहीं मिला जवाब

सरकारी वकील ने यह भी कहा कि हालांकि राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को विभिन्न पत्र भेजे गए हैं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और इसलिए दरों को अधिसूचित नहीं किया जा सका। पीठ ने कहा, “भारत संघ केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजा गया है और वे जवाब नहीं दे रहे हैं।

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