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Sunita Williams: सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष से भारत का पहला दृश्य: एक अनोखा और अविस्मरणीय अनुभव

अंतरिक्ष से लौटने पर सुनीता विलियम्स को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा? आखिरकार 8 महीनों से अंतरिक्ष में फंसी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स की वापसी का प्लान फाइनल हो गया है. उन्हें 12 मार्च को धरती पर लाया जाएगा. इतने लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण अब उनकी सेहत पर कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. अंतरिक्ष से लौटने पर सुनीता विलियम्स को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा? मार्च में स्पेस से लौटेंगी सुनीता विलियम्स TV9 Bharatvarsh TV9 Bharatvarsh | Updated on: Feb 13, 2025 | 1:25 PM अंतरिक्ष से धरती पर लौटना इतना आसान नहीं. 8 दिनों के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजी गईं भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आखिरकार 12 मार्च 2025 को धरती पर लौटने वाली हैं. उन्हें और उनके साथी बुच विलमोर को स्पेसक्राफ्ट “स्टारलाइनर” के जरिए वापस आना था, लेकिन तकनीकी खराबी के चलते यह मिशन अनुमान से अधिक लंबा खिंच गया. नतीजा यह हुआ कि 8 दिनों की यात्रा अब 8 महीनों में बदल गई. इतने लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण अब उनकी सेहत पर कई प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. इन 7 तरह के मुश्किलों का करना पड़ सकता है सामना 1. चलना-फिरना हो सकता है मुश्किल: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं. वहां कोई भी काम करने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि हर चीज हवा में तैरती रहती है. लेकिन धरती पर लौटते ही शरीर को गुरुत्वाकर्षण के साथ तालमेल बिठान पड़ता है. यही वजह है कि एस्ट्रोनॉट्स को पहले कुछ दिनों तक चलने फिरने और संतुलन बनाने में मुश्किल होती है. ये भी पढ़ें PM मोदी को ठहराने के लिए वाशिंगटन का ब्लेयर हाउस ही क्यों चुना गया? PM मोदी को ठहराने के लिए वाशिंगटन का ब्लेयर हाउस ही क्यों चुना गया? कैसे भारत को बदनाम करने की किताबी कोशिश सरोजिनी नायडू ने की थी नाकाम? कैसे भारत को बदनाम करने की किताबी कोशिश सरोजिनी नायडू ने की थी नाकाम? धरती पर सूरज... क्या है फ्रांस का ITER प्रोजेक्ट, जिसका भारत हिस्सा? धरती पर सूरज... क्या है फ्रांस का ITER प्रोजेक्ट, जिसका भारत हिस्सा? 2. हड्डियों पर असर: ISS में महीनों तक रहने से हड्डियों का घनत्व हर महीने लगभग 1% तक कम हो जाता है. खासतौर पर पैरों, पीठ और गर्दन की हड्डियां अधिक प्रभावित होती हैं. इससे सुनीता को वापस आने के बाद शारीरिक गतिविधियों में तकलीफ हो सकती है. 3. संतुलन और कोऑर्डिनेशन में दिक्कत: हमारे कानों और मस्तिष्क में एक खास संतुलन प्रणाली जिसे वेस्टिबुलर सिस्टम कहते हैं शरीर को स्थिर रहने में मदद करती है. अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण यह प्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है. ऐसे में सुनीता को खड़े होने, चलने और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच तालमेल बनाने में दिक्कत हो सकती है. 4. आंखों पर प्रभाव: स्पेस में जीरो ग्रैविटी के कारण शरीर का तरल पदार्थ सिर की ओर बढ़ जाता है, जिससे आंखों के पीछे की नसों पर दबाव पड़ता है. इसे इसे स्पेसफ्लाइट एसोसिएटेड न्यूरो-ओकुलर सिंड्रोम (SANS) कहा जाता है. इसका असर उनकी दृष्टि पर पड़ सकता है और हो सकता है कि उन्हें चश्मा लगाने की जरूरत पड़े. 5. माइक्रोग्रैविटी की आदत: अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद एस्ट्रोनॉट्स माइक्रोग्रैविटी के आदी हो जाते हैं. वहां किसी भी चीज को छोड़ने पर वह तैरती रहती है, लेकिन धरती पर लौटने के बाद भी उनका मस्तिष्क उसी तरीके से काम करता है. ऐसे में शुरुआत में वे अनजाने चीजों को हवा में छोड़ देते हैं, ये भूलकर कि अब वे गिर जाएंगी. 6. इम्यून सिस्टम और रेडिएशन का प्रभाव: स्पेस में हाई-लेवल रेडिएशन के संपर्क में रहने से एस्ट्रोनॉट्स की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है. इससे उन्हें संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा, लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से डीएनए में बदलाव, हृदय से जुड़ी समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं. 7. अंतरिक्ष एनीमिया: एक चौंकाने वाली सच्चाई यह है कि अंतरिक्ष में रहते हुए उनका खून धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. इसे अंतरिक्ष एनीमिया यानी Space Anaemia कहा जाता है. दरअसल, हमारी धरती पर शरीर हर सेकंड 20 लाख रेड ब्लड सेल्स बनाता और नष्ट करता है. लेकिन जब कोई अंतरिक्ष में जाता है, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है. नेचर मेडिसिन में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, छह महीने की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट्स का शरीर हर सेकंड 30 लाख रेड ब्लड सेल्स नष्ट करने लगता है, यानी सामान्य से 54% ज्यादा. धरती पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को कमज़ोरी, थकान, सुस्ती महसूस हो सकती है. तो सुनीता विलियम्स कब तक पूरी तरह रिकवर होंगी? धरती पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को सामान्य जीवन में वापस आने में 45 दिन से लेकर कुछ महीनों या एक साल तक का समय लग सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितने समय तक अंतरिक्ष में रहे हैं और उनके शरीर पर इसका कितना असर पड़ा है. सुनीता की सेहत को लेकर डॉक्टर्स भी सतर्क हैं और उनके रिकवरी प्लान को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है. आने वाले महीनों में मेडिकल सुपरविजन और फिजिकल थेरेपी के जरिए उन्हें सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जाएगा.

Sunita Williams: सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष से भारत का पहला दृश्य: एक अनोखा और अविस्मरणीय अनुभव। भारतीय मूल की नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने भारत को महान देश बताया है। उन्होंने भारत से जुड़ी अपनी यादों का भी जिक्र किया।

दरअसल, सुनीता विलियम्स मीडिया से रूबरू हुईं। इस दौरान ज्यादातर भारत से जुड़े सवाल ही उनसे पूछे गए। उनसे पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है। यह रोशनी के नेटवर्क जैसा दिखता है। गुजरात, महाराष्ट्र से लेकर सभी छोटे-बड़े शहर और समुद्र… यह अद्भुत है।

उन्होंने कहा, ‘भारत अद्भुत है। हर बार जब हम हिमालय के ऊपर से गुजरे और मैं आपको बताऊं, बुच ने हिमालय की कुछ अविश्वसनीय तस्वीरें लीं। बस अद्भुत।’ वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि जब वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में थीं तो अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता था। उनसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ उनके सहयोग की संभावना के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि जरूर। हम हर जरूरी मदद करेंगे।

संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने अपनी संभावित भारत यात्रा पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं अपने पिता के देश जाऊंगी। वहां मैं एक्सिओम मिशन पर जाने वाले भारतीय नागरिक से भी मुलाकात करूंगी। मैं उनसे कभी न कभी जरूर मिलूंगी। हम उनके साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। भारत एक महान देश है। वहां एक शानदार लोकतंत्र है, जिसने अंतरिक्ष जगत में अपने कदम जमा लिए हैं। हम इसका हिस्सा बनना और उनकी मदद करने में जरा भी नहीं हिचकिचाएंगे।’ हालांकि, सुनीता विलियम्स की भारत यात्रा की तारीख अब तक तय नहीं है।

नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में फंसी रहीं
59 साल नासा अंतरिक्ष यात्री और साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर ने स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के हिस्से के रूप में पृथ्वी पर लौटने के कुछ दिनों बाद अपने पहले संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात की। दोनों नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में फंसे रहे थे।

एक्सिओम मिशन 4 के बारे में जानिए
उन्होंने एक्सिओम मिशन 4 (एक्स-4) वाणिज्यिक अंतरिक्ष यात्री मिशन का भी जिक्र किया। इसमें भारत के मिशन पायलट शुभांशु शुक्ला भी शामिल होंगे। लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला 1984 के बाद से अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारी राकेश शर्मा के बाद भारत की दूसरी अंतरिक्ष यात्री होंगे।

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भारत को लेकर क्या-क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले भी बताया है, यह लहर की तरह है। यह भारत में नीचे की ओर बहती है। यह कई रंगों में है। मुझे लगता है कि जब आप पूर्व से आते हैं, गुजरात और मुंबई की तरफ, वहां के तट से दूर मछली पकड़ने का बेड़ा आपको थोड़ा सा संकेत देता है कि हम यहां आ गए हैं। फिर पूरे भारत में मुझे जो आभास हुआ, वह बड़े शहरों से छोटे शहरों में नीचे जाने वाली रोशनी के एक नेटवर्क की तरह है। रात के साथ-साथ दिन के समय भी देखना अविश्वसनीय है।’

भारत से खास नाता
सुनीता के पिता दीपक पांड्या गुजरात से थे और 1958 में अमेरिका आए थे। यहां उन्होंने क्लीवलैंड, ओहियो में मेडिसिन में इंटर्नशिप और रेजीडेंसी ट्रेनिंग की। सुनीता का जन्म ओहियो में दीपक और उर्सुलाइन बोनी पांड्या के घर हुआ था।

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