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स्वरोजगार स्थापित करने हेतु विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया

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स्वरोजगार स्थापित करने हेतु विद्यार्थियों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गय।

कटनी। पंडित देव प्रभाकर शास्त्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरुजी कला विकासखंड रीटी मैं विद्यार्थियों को कम लागत तकनीकी जीरो बजट फार्मिंग के अंतर्गत व्यावसायिक शिक्षा के तहत शिक्षा के साथ आत्मनिर्भर स्वावलंबी एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए जैविक खेती का प्रशिक्षण जैविक कृषि विशेषज्ञ राम सुख दुबे द्वारा दिया गया। जैविक खेती टिकाऊ खेती में रासायनिक उत्पादों का उपयोग कम करके पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बिना कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके फसलों के उत्पादन में उत्तरोत्तर वृद्धि करके बढ़ती हुई जनसंख्या की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। जैविक खेती से तात्पर्य प्राकृतिक पदार्थ से निर्मित खाद व दवाओं की आधिकारिक उपयोग से है यह सदाबहार कृषि पद्धति है जो कि पर्यावरण की स्वच्छता जल एवं वायु की शुद्धता मृदा का प्राकृतिक स्वरूप बनाने वाली जलधारण क्षमता बढ़ाने वाली गांव में रोजगार के अवसर प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन बढ़ाने की जानकारी दी गई। रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध एवं संतुलित मात्रा में उपयोग से जीवांश कार्बन का स्तर निरंतर घटता जा रहा है जिसके कारण मृदा की भौतिक रासायनिक एवं जैविक गुणों मैं गिरावट आई हैभविष्य में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता को संरक्षित रखने तथा इसको टिकाऊ बनाए रखने के लिए जैविक खेती अत्यंत आवश्यक है रसायनों के लगातार प्रयोग से लाभकारी जीव जंतुओं के संख्या में कमी हो रही है इससे जैव विविधता के नष्ट होने का खतरा है जैविक आदानों के प्रयोग द्वारा इसे बचाया जा सकता हैl

विद्यार्थियों को विभिन्न जैविक खाद एवं कीटनाशकों के निर्माण एवं फसलों में उपयोग विभिन्न पोषक तत्वों तथा जैव उर्वरकों का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया
। प्राचार्य राजकुमार धुर्वे एवं व्यावसायिक शिक्षक दिनेश नाक तोड़े ने प्रशिक्षण संपन्न कराने में सहयोग किया।

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