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Speaker of lok sabha: कौन बनेगा लोकसभा का स्पीकर? ओम बिरला

Speaker of lok sabha: कौन बनेगा लोकसभा का स्पीकर? ओम बिरला

Speaker of lok sabha: कौन बनेगा लोकसभा का स्पीकर? ओम बिरला , इस बार लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में चल रहे हैं, लेकिन पार्टी को तय करना है कि स्पीकर का पद अपने पास रखेगी या फिर एनडीए के सहयोगी दलों को सौंपेगी. टीडीपी और जेडीयू इस बार के चुनाव में किंगमेकर के रूप में उभरी है, इसलिए लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी की पर भी उनकी नजरें हैं.

लोकसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर से सरकार बन गई है. मंत्रिमंडल का गठन हो चुका है और मंत्रालयों का भी बंटवारा हो गया है. अब सब की निगाहें लोकसभा के स्पीकर पर है. ओम बिरला पिछले दो दशकों के दौरान ऐसे लोकसभा स्पीकर हैं, जिन्होंने फिर से लोकसभा का चुनाव जीता है. ओम बिरला से पहले पीए संगमा ऐसे स्पीकर थे जो फिर से सांसद चुने गए थे. मोदी कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनने के बाद ओम बिरला को बीजेपी क्या फिर से स्पीकर बनाने का फैसला करेंगी?

देश में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद अब कामकाज के लिए 24 जून से संसद का ग्रीष्मकालीन सत्र शुरू हो सकता है. इस सत्र में निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी तो साथ ही लोकसभा के नए अध्यक्ष का चुनाव भी होना है. इस बार लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में चल रहे हैं, लेकिन पार्टी को तय करना है कि स्पीकर का पद अपने पास रखेगी या फिर एनडीए के सहयोगी दलों को सौंपेगी. टीडीपी और जेडीयू इस बार के चुनाव में किंगमेकर के रूप में उभरी है, इसलिए लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी की पर भी उनकी नजरें हैं.

संविधान के मुताबिक, नई लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले अध्यक्ष का पद खाली हो जाता है. राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रोटेम स्पीकर निर्वाचित लोकसभा सांसदों को शपथ दिलाने का काम करते हैं. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष को बहुमत से चुना जाता है. हालांकि, लोकसभा स्पीकर के चुने जाने के लिए कोई विशिष्ट मानदंड नहीं है. 2014 में बीजेपी पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई तो सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष चुनी गई थीं. इसके बाद 2019 में ओम बिरला स्पीकर बने. बिरला तीसरी बार लोकसभा के सांसद चुने गए हैं और उन्हें नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है. ऐसे में ओम बिरला के फिर से स्पीकर बनने की चर्चा है, लेकिन अभी तक कोई संकेत नहीं मिले हैं.

सत्तारूढ़ दल के सदस्य ज्यादातर निर्वाचित होते रहे
लोकसभा अध्यक्ष के पद पर सत्तारूढ़ दल के सदस्य ज्यादातर निर्वाचित होते रहे हैं. इसी परंपरा के मुताबिक पहली लोकसभा यानी 1952 से लेकर 1991 में दसवीं लोकसभा तक तो सत्ताधारी दल का सदस्य ही इस पद के लिए विराजमान होते रहे हैं, लेकिन गठबंधन सरकारों का दौर शुरू होने के साथ यह परंपरा टूटी और कई मौके ऐसे आए हैं, जब सत्तारूढ दल के बजाय उसके सहयोगी या बाहर से समर्थन करने वाले दल के सदस्य को यह पद मिला. 2009 से लोकसभा स्पीकर का पद सत्ताधारी दल के पास है. 2009 में यूपीए सरकार में कांग्रेस नेता मीरा कुमार स्पीकर रही है तो मोदी सरकार के पहले कार्यकाल 2014 में सुमित्रा महाजन और दूसरे कार्यकाल 2019 में ओम बिरला रहे हैं.

पीएम मोदी के नेतृत्व में एक बार फिर से एनडीए की सरकार बनी है. ऐसे में बीजेपी लोकसभा स्पीकर का पद पर ओम बिरला को सौंपती है तो बलराम जाखड़ के बाद ओम बिरला लगातार स्पीकर बनने वाले दूसरे नेता होंगे. भारतीय राजनीति में लगातार दो बार स्पीकर बनने का खिताब कांग्रेस नेता बलराम जाखड़ के नाम दर्ज है. बलराम जाखड़ ने 1980 में पहली बार लोकसभा के स्पीकर बने थे. इसके बाद 1984 में दोबारा से लोकसभा अध्यक्ष बने और 1989 तक रहे. लगातार दो बार लोकसभा में पूर्ण अवधि के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने का अनूठा सम्मान उनके नाम है.

गणेश वासुदेव मावलंकर लोकसभा के पहले अध्यक्ष

आजादी के बाद पहली बार1952 में सरकार बनी तो लोकसभा के अध्यक्ष पद पर गणेश वासुदेव मावलंकर चुने गए. 1956 में उनके निधन के बाद शेष कार्यकाल के लिए उनके स्थान पर कांग्रेस के ही अनंतशयनम अयंगार का चुनाव भी निर्विरोध हुआ. इसके बाद 1957 के चुनाव के बाद दूसरी लोकसभा के अध्यक्ष भी अयंगार ही चुने गए. 1962 में तीसरी लोकसभा में सरदार हुकुम सिंह और चौथी लोकसभा में नीलम संजीव रेड्डी भी अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए. इसके बाद जीएस ढिल्लो, बलिराम भगत, नीलम रेड्डी और के एस हेगड़े स्पीकर रहे, लेकिन चारों लोकसभा अध्यक्ष अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. 1980 में मध्यावधि चुनाव हुए और सातवीं लोकसभा अस्तित्व में आई तो बलराम जाखड़ स्पीकर चुने गए.

बलराम जाखड़ के बाद रवि राय और 1991 के चुनाव के बाद शिवराज पाटिल लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए. 1996 से लेकर 1998 तक पीए संगमा लोकसभा स्पीकर रहे. संगमा के बाद 1999 में टीडीपी के सांसद जीएमसी बालयोगी लोकसभा अध्यक्ष चुने गए थे, लेकिन 2002 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई. इसके बाद शिवसेना के मनोहर जोशी लोकसभा स्पीकर बने. 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व यूपीए की सरकार बनी, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सोमनाथ चटर्जी लोकसभा अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद 2009 में मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष चुनी गई. बीजेपी की सरकार 2014 में बनी सुमित्रा महाजन स्पीकर रहीं और 2019 में ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष चुने गए.

ओम बिरला एक बार फिर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने हैं और मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनी है. बीजेपी ने इस बार अपने दम पर बहुमत नहीं जुटा सकी है और एनडीए के सहयोगी दलों के सहारे सरकार बनाने में सफल रही है. ऐसे में सभी की निगाहें लोकसभा स्पीकर के पद पर है. एनडीए के सहयोगी टीडीपी अपने किसी नेता को स्पीकर बनाने की डिमांड कर रही है तो बीजेपी यह पद हरहाल में अपने पास रखना चाहती है. देखना है कि बीजेपी लोकसभा का अध्यक्ष अपना बनाती है तो फिर किसके नाम पर मुहर लगाएगी?

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