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RBI की सख्ती से अर्थव्यवस्था पर असर: गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

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RBI की सख्ती से अर्थव्यवस्था पर असर: गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं अमेरिकी बैंक के अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के नेतृत्व में पेश की गई रिपोर्ट में लिखा है कि चालू वर्ष की डाउनग्रेडिंग में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सरकारी खर्च में 35% साल-दर-साल की कमी शामिल है, जो सप्ताह भर चलने वाले आम चुनाव के साथ मेल खाती है. इस रिपोर्ट में RBI की सख्ती से होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया गया है. चलिए इसे विस्तार से जानते हैं।

अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने भारत की ग्रोथ को लेकर अपनी रिपोर्ट में चिंता जताई है. इसमें खास बात यह है कि कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में आरबीआई की सख्ती को इसका जिम्मेदार ठहराया है. गोल्डमैन के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक की सख्ती के कारण घरेलू कर्ज लेने से मंदी आ सकती है. जिसकी वजह से ग्रोथ धीमी होगी और इकोनॉमी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. जिसका सीधा असर भारत की जीडीपी पर देखने को मिल सकता है।

कितनी रहेगी ग्रोथ रेट?

गोल्डमैन सैक्स ने केंद्र सरकार के खर्च में कमी का हवाला देते हुए इस साल और अगले साल के लिए भारत के ग्रोथ रेट में 20 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की है. बैंक को अब उम्मीद है कि कैलेंडर वर्ष 2024 में देश की अर्थव्यवस्था 6.7% और 2025 में 6.4% की दर से बढ़ेगी. अमेरिकी बैंक के अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के नेतृत्व में पेश की गई रिपोर्ट में लिखा है कि चालू वर्ष की डाउनग्रेडिंग में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सरकारी खर्च में 35% साल-दर-साल की कमी शामिल है, जो सप्ताह भर चलने वाले आम चुनाव के साथ मेल खाती है.

आरबीआई की सख्ती बनी परेशानी?

अगले वर्ष भारत की वृद्धि सरकार द्वारा बजट में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 4.5% से नीचे लाने की प्रतिबद्धता के कारण बाधित होगी. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बैंकों द्वारा अनसिक्योर लोन को कंट्रोल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के सख्त नियमों के कारण घरेलू लोन में मंदी देखी जा सकती है.

हालांकि, आसान मौद्रिक नीति अगले साल रियल जीडीपी वृद्धि पर कुछ दबाव को कम कर सकती है, क्योंकि गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि आरबीआई दिसंबर 2024 में रेपो रेट में बदला का साइकल शुरू कर सकता है.

क्या कहती है पूरी रिपोर्ट?

ऑटोमोटिव इंडस्ट्री ने हाल ही में मजबूत प्रदर्शन दिखाया है, गोल्डमैन सैक्स ने इसके लिए ओवरवेट पोजीशन बनाए रखी है. उन्होंने कहा कि सरकार के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करने से औद्योगिक क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है. डिफेंसिव सेक्टर पर भी रिपोर्ट में ध्यान दिया गया है, जिसमें दूरसंचार कंपनियों को टैरिफ बढ़ोतरी से लाभ मिला है और बीमा सेक्टर में मजबूती देखी गई है. उन्होंने कहा कि गोल्डमैन सैक्स एग्रीकल्चर, ग्रीन एनर्जी, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और ‘मेक इन इंडिया’ पहल सहित प्रोडक्शन से जुड़े इनिशिएटिव पर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर पॉजिटिव हैं.

2075 तक इतनी बड़ी होगी भारत की इकोनॉमी

गोल्डमैन सैक्स ने अपने पहले की रिपोर्ट में भारत की इकोनॉमी को लेकर ये अनुमान लगाया था कि साल 2075 तक इसकी साइज 52.5 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है. खास बात तो ये है कि उस समय भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी होगा. गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, अगले 50 साल में देश की जीडीपी का साइज करीब 14 गुना तक बढ़ जाएगा.

अनुमान के अनुसार, देश की मौजूदा जीडीपी 3.75 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है. जिसके अगले 4 साल में 5 ट्रिलियन के होने का अनुमान लगाया गया है. दूसरी ओर अमेरिका की जीडीपी साल 2075 तक 51.5 ट्रिलियन डॉलर होगी. जोकि भारत की अनुमानित जीडीपी के साइज से 1 ट्रिलियन डॉलर कम है. खास बात तो ये है कि मौजूदा समय में अमेरिका जीडीपी 29 ट्रिलियन डॉलर है. इसका मतलब है कि अमेरिका जीडीपी में इजाफा अगले 50 साल में दोगुने से भी कम होगा.

 

 

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