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मध्यप्रदेश के मन मे अब मोहन मामा: MP में अब ‘मामा’ नहीं ‘मोहन ‘का राज, फोटोशूट में थे साइडलाइन

मध्यप्रदेश के मन मे अब मोहन मामा: MP में अब ‘मामा’ नहीं ‘मोहन ‘का राज, फोटोशूट में थे साइडलाइन। फोटोशूट में थे साइडलाइन तस्वीर में देखा जा सकता है कि बीच में मनोहर लाल खट्टर, उनके दाईं ओर नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल बैठे हैं. जबकि बाईं ओर वीडी शर्मा और उनके बराबर में शिवराज सिंह चौहान को बैठे देखा जा सकता है. इस तस्वीर के सामने आने के बाद से कयास लगाए जाने लगे थे कि शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी ने साइडलाइन करने का फैसला कर लिया है.

 

मध्य प्रदेश में अब शिवराज सिंह चौहान का राज खत्म हो गया है. सोमवार को बीजेपी विधायक दल की बैठक में मोहन यादव को मुख्यमंत्री चुना गया. इसके बाद मोहन यादव को बधाई देने का दौर शुरू हो गया. दिलचस्प बात ये है कि मोहन यादव का नाम मुख्यमंत्री की रेस में दूर-दूर तक नहीं था.

लेकिन जिस तरह आदिवासी चेहरे विष्णुदेव साय को बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बनाया. उसी तरह मध्य प्रदेश में मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई. वह शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. केंद्र के साथ-साथ आरएसएस के भी करीबी माने जाते हैं.

कयासों पर लगा विराम

 

जब मध्य प्रदेश में बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की तो कयासबाजी शुरू हो गई कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा. शिवराज सिंह चौहान से लेकर प्रह्लाद पटेल का नाम सामने आने लगा. ये दोनों ही नेता ओबीसी समाज से आते हैं. शिवराज सिंह चौहान 15 साल सरकार चला चुके हैं. इसलिए उनका नाम सबसे ऊपर था. उनकी लाडली योजना ने चुनाव में बीजेपी की जीत की पटकथा लिखने में अहम भूमिका निभाई थी.

लेकिन एमपी में ‘मामा’ का राज नहीं लौटेगा, इसके संकेत बीजेपी ने पहले ही दे दिए थे. दरअसल बीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले नव निर्वाचित विधायकों का फोटो शूट हुआ था, जिसमें सबसे आगे वाली लाइन में केंद्रीय पर्यवेक्षक और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अलावा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठे थे.

तस्वीर से मिल गया था सिग्नल

तस्वीर में देखा जा सकता है कि बीच में मनोहर लाल खट्टर, उनके दाईं ओर नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल बैठे हैं. जबकि बाईं ओर वीडी शर्मा और उनके बराबर में शिवराज सिंह चौहान को बैठे देखा जा सकता है. इस तस्वीर के सामने आने के बाद से कयास लगाए जाने लगे थे कि शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी ने साइडलाइन करने का फैसला कर लिया है. दरअसल अब बीजेपी ने फ्रेश चेहरों पर दांव खेलने की योजना बनाई है. पुष्कर सिंह धामी, विष्णुदेव साय के बाद मोहन यादव इसी कड़ी का हिस्सा हैं. शिवराज सिंह चौहान 15 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे.

खांचे में फिट बैठे मोहन यादव

भले ही उनकी पॉपुलैरिटी महिलाओं और प्रदेश में किसी से छिपी नहीं है. लेकिन मिशन 2024 को देखते हुए बीजेपी समीकरण साधने और एक्सपेरिमेंट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. एमपी में ओबीसी की एक बड़ी आबादी है इसलिए युवा और हिंदुवादी चेहरे के तौर पर मोहन यादव इस खांचे में फिट बैठते हैं.

बता दें कि बीजेपी ने 17 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखी. 230 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 163 सीट जीतीं, जबकि कांग्रेस 66 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही.

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