Site icon Yashbharat.com

Shivpuri Sanjivani Clinic Fraud: दमोह फर्जीवाड़े के बाद शिवपुरी में डॉक्टरों के डॉक्यूमेंट्स की जांच शुरू; टीम के आते ही एक डॉक्टर का इस्तीफा, दूसरा छुट्टी पर फरार

images 26

Shivpuri Sanjivani Clinic Fraud: दमोह फर्जीवाड़े के बाद शिवपुरी में डॉक्टरों के डॉक्यूमेंट्स की जांच शुरू; टीम के आते ही एक डॉक्टर का इस्तीफा, दूसरा छुट्टी पर फरार

शिवपुरी: दमोह में सामने आए डॉक्टरों की फर्जी नियुक्ति मामले के बाद मध्य प्रदेश शासन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों की सघन जांच-पड़ताल (Scrutiny) शुरू हो गई है। इसी क्रम में शिवपुरी जिले के संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ डॉक्टरों की डिग्रियों और नियुक्ति प्रक्रियाओं की जांच के लिए जैसे ही स्वास्थ्य विभाग प्रबंधन ने एक विशेष जांच कमेटी गठित की, वैसे ही विभाग में हड़कंप मच गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि जांच टीम की पूछताछ और दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) से ठीक पहले ही एक डॉक्टर ने आनन-फानन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जबकि एक अन्य डॉक्टर अचानक लंबी छुट्टी (अवकाश) पर चले गए हैं। डॉक्टरों के इस कदम के बाद जिला स्वास्थ्य प्रबंधन का शक गहरा गया है और पूरा मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।

 जिले के 7 संजीवनी क्लीनिकों में होनी है जांच

शिवपुरी जिले में वर्तमान में कुल सात संजीवनी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इन सभी क्लीनिकों में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) या अन्य योजनाओं के तहत अनुबंध पर डॉक्टरों की नियुक्तियां की गई थीं। दमोह के फर्जीवाड़े के बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी किए हैं कि सभी संविदा और अनुबंध पर रखे गए डॉक्टरों के मूल दस्तावेजों, काउंसिल रजिस्ट्रेशन और अनुभव प्रमाण पत्रों की कड़ाई से री-चेकिंग की जाए।

 पूछताछ से पहले ही क्यों भागे डॉक्टर?

जांच टीम के सक्रिय होने से पहले ही डॉक्टरों द्वारा उठाए गए इस कदम ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है:

 दोषी पाए जाने पर दर्ज होगी सीधे FIR: स्वास्थ्य विभाग

शिवपुरी जिला स्वास्थ्य प्रबंधन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय के अनुसार, जांच कमेटी को तय समय सीमा के भीतर सभी सातों क्लीनिकों की रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

प्रबंधन का सख्त अल्टीमेटम: यदि जांच पड़ताल के दौरान किसी भी डॉक्टर की डिग्री फर्जी पाई जाती है या नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी उजागर होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा।

दमोह घोटाले के बाद अब शिवपुरी का यह मामला सामने आने से प्रदेश के अन्य जिलों में भी हड़कंप की स्थिति है और आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

Exit mobile version