बिना विभागीय जांच नहीं कर सकते सेवा समाप्त” MP हाई कोर्ट का सिवनी सहकारी समिति मामले में बड़ा निर्देश
बिना विभागीय जांच नहीं कर सकते सेवा समाप्त" MP हाई कोर्ट का सिवनी सहकारी समिति मामले में बड़ा निर्देश

बिना विभागीय जांच नहीं कर सकते सेवा समाप्त” MP हाई कोर्ट का सिवनी सहकारी समिति मामले में बड़ा निर्देश
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सेवा से बर्खास्तगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने सिवनी जिले की सेवा सहकारी समिति समनापुर के पूर्व प्रबंधक रमेश कुमार शरणागत की याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें 15 दिनों के भीतर नया अभ्यावेदन (Representation) प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही, अदालत ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के 90 दिनों (3 महीने) के भीतर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
केवल आपराधिक दोषसिद्धि के आधार पर बर्खास्तगी पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुघोष भामोरे और निशांत मिश्रा ने प्रभावी पक्ष रखा।
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याचिकाकर्ता का तर्क: याचिका में कहा गया कि केवल किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि (Conviction) के आधार पर बिना कोई विभागीय जांच (Departmental Enquiry) किए सीधे नौकरी से निकाल दिया गया।
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नियमों का हवाला: वकीलों ने कोर्ट को बताया कि सहकारी समिति के सेवा नियमों में बिना विभागीय जांच किए सीधे सेवा समाप्त करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
‘संजय चौहान बनाम मध्य प्रदेश शासन’ के फैसले का संदर्भ
याचिकाकर्ता के वकीलों ने हाई कोर्ट के ही पूर्व ऐतिहासिक निर्णय ‘संजय चौहान बनाम मध्य प्रदेश शासन’ का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी को हटाने से पहले विभागीय जांच प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। बिना विभागीय जांच नहीं कर सकते सेवा समाप्त” MP हाई कोर्ट का सिवनी सहकारी समिति मामले में बड़ा निर्देश
हाई कोर्ट का निर्देश:
अदालत ने मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना याचिका का निराकरण कर दिया। कोर्ट ने कहा कि:
“यदि याचिकाकर्ता पूर्व फैसले की प्रति के साथ 15 दिन में नया अभ्यावेदन सौंपता है, तो सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) उस पर कानून और तय नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर विचार कर अंतिम निर्णय लें।







