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SEBI Penalty On Suzlon: शेयर बाजार में सुजलॉन एनर्जी को SEBI का बड़ा झटका; क्लीन चिट का फैसला पलटा, वित्तीय हेरफेर के आरोप में प्रमोटर्स सहित कंपनी पर ₹28.95 करोड़ का भारी जुर्माना

SEBI Penalty On Suzlon: शेयर बाजार में सुजलॉन एनर्जी को SEBI का बड़ा झटका; क्लीन चिट का फैसला पलटा, वित्तीय हेरफेर के आरोप में प्रमोटर्स सहित कंपनी पर ₹28.95 करोड़ का भारी जुर्माना

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने रिन्यूएबल एनर्जी (विंड पावर) सेक्टर की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) और उसके पूर्व शीर्ष प्रबंधन को एक बहुत बड़ा झटका दिया है। सेबी ने अपने ही एक पुराने आदेश को पूरी तरह पलटते हुए सुजलॉन तथा उसके कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कुल 28.95 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना ठोक दिया है।

यह पूरा मामला बैलेंस शीट और खातों में भ्रामक जानकारी देने तथा कंपनी के भीतर ही पैसों को गोल-गोल घुमाकर (फंड रोटेशन) कागजों पर बंपर मुनाफा दिखाने से जुड़ा है। गौरतलब है कि जून 2025 में एक अधिकारी ने इस मामले में कंपनी को क्लीन चिट दे दी थी, जिसे अब सेबी ने शेयर बाजार और आम निवेशकों के हितों के खिलाफ बताते हुए पूरी तरह रद्द कर दिया है।

 जुर्माने की चाबुक: किस पर कितनी पेनाल्टी और 45 दिन का अल्टीमेटम

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सभी दोषियों को जुर्माने की यह रकम जमा करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है:

  • सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड (कंपनी): 15.95 करोड़ रुपये

  • विनोद आर. तांती (पूर्व वाइस-चेयरमैन): 5.75 करोड़ रुपये

  • गिरीश आर. तांती (पूर्व शीर्ष अधिकारी): 5.45 करोड़ रुपये

  • कीर्ति जे. वगाडिया (पूर्व सीएफओ): 1.50 करोड़ रुपये

  • अमित अग्रवाल (पूर्व अधिकारी): 30 लाख रुपये

मामले की पृष्ठभूमि: यह पूरी कार्रवाई दिसंबर 2019 में मिली एक गुमनाम शिकायत के बाद शुरू हुई थी। सेबी ने जब फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त कर वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-21 तक के वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से जांच कराई, तो परतों के पीछे वित्तीय बाजीगरी का यह खेल उजागर हुआ।

कागजी बाजीगरी: 77 करोड़ के बिजनेस को 2,000 करोड़ में बेचा!

सेबी की विस्तृत जांच रिपोर्ट में वित्तीय हेरफेर को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं:

  • दिखाया 1,923 करोड़ का मुनाफा: साल 2014 में सुजलॉन ने अपना ऑपरेशंस-मेंटेनेंस बिजनेस (OMS) अपनी ही एक सब्सिडियरी कंपनी ‘सुजलॉन ग्लोबल सर्विसेज लिमिटेड’ (SGSL) को 2,000 करोड़ रुपये में बेच दिया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस बिजनेस की असल नेट बुक वैल्यू महज 77 करोड़ रुपये थी। इस सौदे के दम पर कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में ₹1,923 करोड़ का तगड़ा मुनाफा दर्ज कर लिया।

  • लोन-डिबेंचर का गोलमाल: सेबी का आरोप है कि इस सौदे के ₹1,300 करोड़ कंपनी में बाहर से कभी आए ही नहीं। यह रकम सिर्फ लोन और डिबेंचर के रूप में दोनों कंपनियों के बीच घूमती रही। मार्च 2017 में 150 करोड़ रुपये को छह बार और 100 करोड़ रुपये को चार बार रोटेट करके कागजों पर पेमेंट सेटलमेंट दिखाया गया।

एक ही संपत्ति से ‘डबल मुनाफा’ कमाने का खेल

वित्तीय बाजीगरी यहीं नहीं रुकी; इसके बाद एसजीएसएल के शेयरों को सुजलॉन की ही एक अन्य कंपनी ‘सुजलॉन स्ट्रक्चर्स लिमिटेड’ में ट्रांसफर कर दिया गया। इस अंदरूनी सौदे के जरिए 829.78 करोड़ रुपये का एक और मुनाफा खातों में चढ़ा दिया गया।

सेबी के नए आदेश में सख्त लहजे में कहा गया है कि एक ही संपत्ति को ग्रुप की ही कंपनियों के भीतर गोल-गोल घुमाकर दो स्तरों पर भारी मुनाफा दिखाना गंभीर कॉर्पोरेट फ्रॉड की श्रेणी में आता है। इसके अलावा विदेशी सब्सिडियरी ‘एई रोटर होल्डिंग बीवी’ की देनदारियों और सुजलॉन गुजरात विंड पार्क लिमिटेड में फंड के संदिग्ध मूवमेंट को भी सेबी ने पकड़ा है।

 “सिर्फ कागजी प्रक्रिया पूरी कर लेने से क्लीन चिट नहीं मिलेगी”

जून 2025 में कंपनी को यह कहकर बरी किया गया था कि इसमें बोर्ड और शेयरधारकों की मंजूरी जैसी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी थीं। लेकिन सेबी ने अब साफ किया है कि सिर्फ लीगल कागजी खानापूर्ति कर लेने से कोई कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। अगर आपके वित्तीय नतीजे निवेशकों के सामने कंपनी की भ्रामक तस्वीर पेश करते हैं, तो यह बाजार के भरोसे को तोड़ना है।

दूसरी ओर, सुजलॉन ने इन आरोपों का खंडन करते हुए दलील दी है कि यह सारा पुनर्गठन भारी वित्तीय दबाव के दौर में किया गया था और इसका उनके कंसोलिडेटेड खातों पर कोई निगेटिव प्रभाव नहीं पड़ा है।

सुजलॉन एनर्जी सेबी केस: मुख्य विवरण

मुख्य बिंदु विवरण और सेबी की कार्रवाई
कुल जुर्माना राशि ₹28.95 करोड़ (कंपनी और प्रमोटर्स को मिलाकर)
भुगतान की समय सीमा आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर
गड़बड़ी का समयकाल वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2020-21 तक के खाते
मुख्य आरोप आंतरिक संपत्तियों को ट्रांसफर कर ₹1,923 करोड़ और ₹829.78 करोड़ का कृत्रिम मुनाफा दिखाना
कंपनी का स्टैंड आरोपों का खंडन; पुनर्गठन वित्तीय दबाव के कारण किया गया

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