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Sarso Ki Fasal: सरसों की फसल से होगा किसानों को बंपर मुनाफा

Sarso Ki Fasal: सरसों की फसल से होगा किसानों को बंपर मुनाफा

कटनी।  सरसों की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश कटनी जिले में फलीभूत होते दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर कलेक्टर श्री अवि प्रसाद ने जिले में सरसों के उत्पादन को प्रोत्साहित कर कटनी को प्रदेश का अग्रणी सरसों उत्पादक जिला बनाने की दिशा में कोशिशें शुरू की। जिससे बीते साल की तुलना में इस साल जिले में सरसों के फसलोच्छादन क्षेत्र में 3200 हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है।

कलेक्टर श्री प्रसाद ने रीठी के गांवों और खेतों में पहुंचकर किसानों से की चर्चा

 

कलेक्टर श्री प्रसाद ने शुक्रवार को रीठी विकासखंड के गांवों के खेतों में पहुंच कर फसलों का निरीक्षण किया और किसानों से चर्चा की। कैना गांव के किसान कमला प्रसाद पटेल उर्फ चाहानू ने बताया कि इस बार रीठी क्षेत्र में सरसों की फसल किसानों के लिए बंपर कमाई वाली साबित होगी। कलेक्टर ने सरसों की खेती कर रहे किसानों से कहा कि गेहूं की खेती करने वाले अपने पड़ोसी किसानों को भी सरसों उगाने के लिए समझाइश दें।

कहा-पड़ोसी किसानों को भी सरसों की फ़सल लेने की दें सलाह

यहां बताते चलें कि बीते साल के अगस्त, सितंबर माह में रीठी सहित जिले के अन्य ग्रामों के भ्रमण के दौरान किसानों को सरसों की खेती हेतु प्रेरित किया और गेहूं और चना की उपज की तुलना में सरसों से होने वाले अधिक मुनाफे की जानकारी देते रहे। साथ ही उन्होंने किसानों को सरसों की खेती से आमदनी और प्रति हेक्टेयर गेहूं की खेती की तुलना में कम लागत की समझाइश देने कृषि विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित किया था।

जिले में निरंतर बढ़ रहा सरसों का रकबा

जिले में रीठी एवं बहोरीबंद विकासखंड के पठारी क्षेत्र में पानी की कमी होने के कारण रबी की मुख्य फसल गेहूं का उत्पादन कम प्राप्त होता है। साथ ही सरसों की खेती में लागत की तुलना में मुनाफा ज्यादा होता है।जिससे किसानों की विगत वर्षों से सरसों की खेती में रुचि बढी है। जिससे लगातार सरसों का रकबा बढ़ रहा है। इन क्षेत्र में किसानो के द्वारा सरसों की खेती एकल फसल के रूप में की जा रही है।

सरसों की खेती से मिल रहा अधिक मुनाफा

सरसों की खेती किसानों के लिए लाभकारी भी सिद्ध हो रही है स गेहूं की खेती में एक हेक्टर में औसत उत्पादन पठारी क्षेत्र में जहां 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त

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