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खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी, किसानों को राहत लेकिन आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

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 Edible Oil:खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी, किसानों को राहत लेकिन आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर। केंद्र सरकार खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। दिल्ली में प्रस्ताव पर चर्चा जारी है।

खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी, किसानों को राहत लेकिन आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

केंद्र सरकार ने दो महीने पहले यानी 30 मई को कच्चे खाद्य तेलों पर लगने वाले बेसिक आयात शुल्क में 10 प्रतिशत की कटौती की थी। इस निर्णय को 31 मई से लागू किया था। हालांकि, दो महीने से पहले ही बाजार में निर्णय से नकारात्मक प्रतिक्रिया आई।

आयातित तेल का बाजार में प्रभाव बढ़ने से भारतीय किसानों को, जो पहले ही सोयाबीन के दाम कम मिल रहे थे, उनकी उपज के दाम और घट गए। बीते दिनों खाद्य तेल उत्पादकों की विभिन्न संस्थाओं, चाहे वह सोपा हो या साल्वेंट एक्स्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ने सरकार के निर्णय की आलोचना की थी।

त्योहारों में आम आदमी पर महंगे तेल का बोझ

इससे भारतीय तेल उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में खरीफ में सोयाबीन जैसे प्रमुख तिलहन की बुवाई प्रभावित होती दिख रही है। लिहाजा, किसानों को राहत देने के लिए सरकार जल्द ही खाद्य तेलों के आयात पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय ले सकती है।

यदि यह निर्णय होता है, तो इससे घरेलू तिलहन उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है, लेकिन इससे स्थानीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में कुछ तेजी भी देखने को मिल सकती है, जिससे त्योहारों पर उपभोक्ताओं को महंगा तेल खरीदने के लिए विवश होना पड़ेगा।

कुछ व्यापारियों का कहना है कि सरकार खाद्य तेल आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय त्योहारों के बाद ले सकती है, इससे पहले मुश्किल नजर आ रहा है। सोमवार को इंदौर तेल बाजार में ग्राहकी कुछ कमजोर देखने को मिली है।

इंदौर सोया तेल 1215-1218, पाम तेल 1238 रुपये प्रति दस किलो पर स्थिर रहा। मूंगफली तेल में मांग का दबाव अब धीरे-धीरे घटते लगा है। ऐसे में मूंगफली तेल में अब तेजी की गुंजाइश कम है।

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