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केरलम में लाल दुर्ग ढहा:10 साल बाद UDF की शानदार वापसी, 2000 वोटों से पीछे चल रहे CM पिनराई विजयन; क्या वामपंथ का आखिरी किला भी हाथ से निकला?

केरलम में लाल दुर्ग ढहा:10 साल बाद UDF की शानदार वापसी, 2000 वोटों से पीछे चल रहे CM पिनराई विजयन; क्या वामपंथ का आखिरी किला भी हाथ से निकला?

केरलम में लाल दुर्ग ढहा:10 साल बाद UDF की शानदार वापसी, 2000 वोटों से पीछे चल रहे CM पिनराई विजयन; क्या वामपंथ का आखिरी किला भी हाथ से निकला?

केरलम में लाल दुर्ग ढहा:10 साल बाद UDF की शानदार वापसी, 2000 वोटों से पीछे चल रहे CM पिनराई विजयन; क्या वामपंथ का आखिरी किला भी हाथ से निकला?। दक्षिण भारत के राजनीतिक गलियारों से आज की सबसे बड़ी खबर आ रही है। केरलम (केरल) में वामपंथी गठबंधन LDF के 10 साल के शासन का सूरज ढलता नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों और अब तक की मतगणना में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। 1960 के दशक के बाद यह पहली बार होगा जब भारत के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं होगी।

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केरलम में लाल दुर्ग ढहा:10 साल बाद UDF की शानदार वापसी, 2000 वोटों से पीछे चल रहे CM पिनराई विजयन; क्या वामपंथ का आखिरी किला भी हाथ से निकला?

1. बहुमत का आंकड़ा पार: कांग्रेस खेमे में जश्न

चुनाव आयोग के ताज़ा रुझानों के मुताबिक, 140 सीटों वाली विधानसभा में UDF 71 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

2. ‘एंटी-पीपल’ नीतियां पड़ीं भारी?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने LDF के खराब प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता ने “जन-विरोधी नीतियों” के खिलाफ वोट दिया है। वहीं, सांसद शशि थरूर ने कहा, “केरलम के मतदाताओं ने बदलाव की जरूरत को समझा है। सरकार बदलने वाली है और अब राज्य के असली विकास का काम शुरू होगा।”

3. बड़ी हलचल: CM पद का सस्पेंस

बहुमत मिलने के बाद अब सबकी निगाहें अगले मुख्यमंत्री पर टिकी हैं।

Yashbharat.com का विश्लेषण: क्यों ढहा वामपंथ का किला?

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