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रुपये की मजबूती के लिए RBI का बड़ा कदम, ऑफशोर डेरिवेटिव सौदों पर रखेगा सख्त नजर

RBI Recruitment

रुपये की मजबूती के लिए RBI का बड़ा कदम, ऑफशोर डेरिवेटिव सौदों पर रखेगा सख्त नजर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये से जुड़े ऑफशोर डेरिवेटिव सौदों पर निगरानी बढ़ाने के लिए नए नियम लागू करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य विदेशी बाजारों में रुपये की ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी बनाना और उसकी वास्तविक कीमत तय करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।

नए नियम जुलाई 2027 से चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे और 2028 तक पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे। इसके तहत बैंकों को अपने ग्रुप कंपनियों और विदेशी इकाइयों द्वारा किए गए रुपये-आधारित डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।

RBI अब नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे ऑफशोर बाजारों में होने वाले सौदों पर भी नजर रखेगा, जहां रुपये की बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग होती है। अब तक इन सौदों की निगरानी सीमित थी, लेकिन नए नियमों से विदेशी बाजारों की गतिविधियों को भी ट्रैक किया जा सकेगा।

बैंकों को कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी, काउंटरपार्टी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारी साझा करनी होगी। हालांकि, 1 मिलियन डॉलर से कम के कॉन्ट्रैक्ट और बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को रिपोर्टिंग से छूट दी गई है।

RBI ने यह भी तय किया है कि जुलाई 2027 तक 70% FX डेरिवेटिव डेटा, जनवरी 2028 तक 80% और जुलाई 2028 तक 100% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम रुपये की वैश्विक कीमत निर्धारण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा और विदेशी बाजारों में होने वाले प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

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