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RBI से मोरेटोरियम लेने वाली 75 फीसदी कंपनियां पहले से ही संकट में, गैर-वित्तीय क्षेत्र की 2,300 कंपनियों पर सर्वे

रिजर्व बैंक

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आरबीआई की ओर से कर्जदारों को राहत के लिए 31 अगस्त तक दी गई मोरेटोरियम सुविधा का लाभ उठाने वाली 75 फीसदी कंपनियों की वित्तीय हालत महामारी से पहले ही खराब थी।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को जारी एक सर्वे में बताया कि अर्थव्यवस्था की सुस्त गति का असर पिछले साल ही कंपनियों पर दिख रहा है।

क्रिसिल ने गैर-वित्तीय क्षेत्र की 2,300 कंपनियों पर किया सर्वे

रेटिंग एजेंसी के अनुसार, देशभर में गैर-वित्तीय क्षेत्र की 2,300 कंपनियों पर किए सर्वे में पता चला है कि तीन चौथाई कंपनियां पहले से ही कर्ज भुगतान को लेकर दबाव झेल रही थीं।

कोविड-19 महामारी में लॉकडाउन शुरू होने के बाद आरबीआई ने मार्च से अगस्त तक ईएमआई भुगतान पर छूट दी थी।

सर्वे में बताया गया है कि महामारी से पहले ही भारत की जीडीपी वृद्धि एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गई थी और जनवरी-मार्च तिमाही में विकास दर 3.1 फीसदी पर आ गई थी।

छोटी कंपनियों की संख्या तीन गुना ज्यादा
क्रिसिल ने बताया कि मोरेटोरियम सुविधा लेने वाली 300-1,500 करोड़ तक टर्नओवर वाली छोटी कंपनियों की संख्या 1,500 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा है।

रेटिंग एजेंसी के निदेशक राहुल गुहा ने कहा कि मोरेटोरियम ने कार्यगत पूंजी संकट से जूझ रही कंपनियों को बड़ा सहारा दिया है।

इसका सबसे ज्यादा फायदा भी रत्न एवं आभूषण, होटल, ऑटो उपकरण, ऑटोमोबाइल डीलर्स, ऊर्जा कंपनियों और पैकेजिंग उद्योग को मिला है।

 

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