रामलला के चढ़ावे पर अपनों ने ही डाला डाका; दान पात्र से चोरी कर रहे थे 5-6 कर्मचारी, कैमरे में कैद हुई करतूत, SIT जांच में बड़ा खुलासा
रामलला के चढ़ावे पर अपनों ने ही डाला डाका; दान पात्र से चोरी कर रहे थे 5-6 कर्मचारी, कैमरे में कैद हुई करतूत, SIT जांच में बड़ा खुलासा

रामलला के चढ़ावे पर अपनों ने ही डाला डाका; दान पात्र से चोरी कर रहे थे 5-6 कर्मचारी, कैमरे में कैद हुई करतूत, SIT जांच में बड़ा खुलासा
अयोध्या : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में हुई लाखों-करोड़ों की हेराफेरी और चोरी के मामले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर हुए इस बड़े घोटाले की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश में बेहद चौंकाने वाले और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस महा-चोरी को अंजाम देने वाले कोई बाहरी तत्व नहीं, बल्कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में तैनात 5 से 6 अंदरूनी कर्मचारी ही थे।
कैमरे में कैद हुआ पाप; दान पात्र से गायब किए जा रहे थे पैसे
राम मंदिर बनने के बाद से ही देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु दिल खोलकर रामलला के चरणों में गुप्त और प्रत्यक्ष दान दे रहे हैं। इसी भारी चढ़ावे को संभालने के दौरान इस काली करतूत को अंजाम दिया गया:
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दान पात्रों की संख्या में इजाफा: शुरुआती दिनों में मंदिर परिसर में केवल $10$ दान पात्र (Donation Boxes) रखे गए थे, जिनकी संख्या भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए अब बढ़ाकर करीब $40$ कर दी गई है।
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गिनती के दौरान हेराफेरी: इन दान पात्रों से निकलने वाली अथाह नकदी को गिनने की प्रक्रिया में कुल $50$ कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, जिसमें ट्रस्ट के कुछ निगरानीकर्ता भी शामिल थे। इन्हीं में से 5-6 शातिर कर्मचारियों ने मिलकर नोटों की गड्डियां गायब करना शुरू कर दिया।
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सीसीटीवी (CCTV) ने खोली पोल: जब ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को पैसों के मिलान में गड़बड़ी की आशंका हुई, तो उन्होंने अत्याधुनिक कैमरों के फुटेज खंगाले। कैमरों के माध्यम से यह पूरी तरह कन्फर्म हो गया कि कर्मचारी ही पैसों की चोरी कर रहे थे।
SIT खंगाल रही है कुंडली; बैंक खातों से लेकर निवेशों पर नजर
चौंकाने वाली बात यह भी है कि कैमरे में पूरी करतूत कैद होने के बावजूद राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक इस मामले की आधिकारिक लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई है। माना जा रहा है कि ट्रस्ट पहले अपने स्तर पर आंतरिक जांच (Internal Enquiry) कर रहा था, लेकिन इसी बीच मामले का भंडाफोड़ हो गया।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभाल रही SIT हर पहलू पर बारीकी से काम कर रही है:
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लेन-देन पर शिकंजा: एसआईटी संदिग्ध पाए गए सभी 5-6 कर्मचारियों और उनके करीबियों के बैंक खातों, हाल ही में किए गए ऑनलाइन लेन-देन और बड़े इनवेस्टमेंट्स (जैसे जमीन-मकान की खरीद) की पूरी कुंडली निकाल रही है।
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कब से चल रहा था खेल?: जांच टीम के सामने इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह चोरी आखिर कितने महीनों से चल रही थी और अब तक रामलला के खजाने से कितनी बड़ी धनराशि गायब की जा चुकी है।
इस खुलासे के बाद अयोध्या के संत समाज और देश के करोड़ों रामभक्तों में भारी आक्रोश है। लोग दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं जो एक मिसाल बन सके।








