स्वामी विवेकानंद जयंती पर सरस्वती शिशु मंदिर में उत्साह और ऊर्जा का संगम,रैली, सूर्य नमस्कार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रेरक उद्बोधन से गूंजा विद्यालय परिसर

स्वामी विवेकानंद जयंती पर सरस्वती शिशु मंदिर में उत्साह और ऊर्जा का संगम,रैली, सूर्य नमस्कार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और प्रेरक उद्बोधन से गूंजा विद्यालय परिस

विवेकानंद जयंती पर विद्यार्थियों ने अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रप्रेम का दिया संदेश

कटनी। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 12 जनवरी, सोमवार को सरस्वती शिशु मंदिर, संजय नगर कटनी में स्वामी विवेकानंद जयंती हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय में सूर्य नमस्कार, नगर भ्रमण रैली, झांकी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल विद्यालय के भैया-बहनों एवं आचार्य परिवार द्वारा सामूहिक सूर्य नमस्कार के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों और आचार्यों द्वारा नगर भ्रमण रैली निकाली गई, जो संपूर्ण नगर में अनुशासन, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती हुई आगे बढ़ी।
विद्यालय परिसर में सरस्वती माता एवं स्वामी विवेकानंद जी के चित्र का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमती पायल जेतवानी उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद जी के युवाओं के प्रति दृष्टिकोण को सरल और प्रभावशाली शब्दों में समझाया।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार युवा वही है जो अपने भीतर असीम ऊर्जा, आत्मविश्वास, साहस और लक्ष्य के प्रति अटूट संकल्प रखता हो। युवा केवल उम्र से नहीं, बल्कि विचारों की ऊँचाई, संकल्प की मजबूती और कर्म की शुद्धता से पहचाना जाता है।
उन्होंने विवेकानंद जी के प्रसिद्ध कथन —
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए”
का भावार्थ समझाते हुए कहा कि यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला मंत्र है। यह युवाओं को आलस्य, भय और भ्रम से बाहर निकालकर सपनों को संकल्प और संकल्प को सफलता में बदलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि यदि युवा अपनी शक्ति को पहचान लें, तो वे स्वयं को ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा दे सकते हैं।
इस अवसर पर आचार्य परिवार से मनोज शुक्ला एवं श्रीमती स्नेहलता सोलंकी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। प्रचारक मनोज कुमार शुक्ला द्वारा भी प्रेरणादायक उद्बोधन दिया गया। कार्यक्रम का संचालन आचार्य रघुराज सिंह सोलंकी ने किया।

अन्य सम्माननीय सह -वक्ताओं के उदबोधन में विद्यार्थी सदन के सामने यह जानकारी रखी गई कि
स्वामी विवेकानंद जयंती जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का विकास करना है l जब शिक्षा संस्कारों से जुड़ती है, तब वह केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है।
ऐसे आयोजन निश्चित रूप से विद्यार्थियों को (आने वाली पीढ़ी को ) कर्तव्यनिष्ठ, आत्मनिर्भर और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।

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