मध्यप्रदेश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बैतूल में ऐलान; आदिवासी समाज को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग, 2040 तक विकसित भारत का संकल्प

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बैतूल में ऐलान; आदिवासी समाज को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग, 2040 तक विकसित भारत का संकल्प

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बैतूल में ऐलान; आदिवासी समाज को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग, 2040 तक विकसित भारत का संकल्प

बैतूल ब्यूरो: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय समाज के उत्थान को लेकर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक विजन देश के सामने रखा है। मध्य प्रदेश के बैतूल में ब्रह्मकुमारी संस्था द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तीकरण महासम्मेलन’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि आदिवासी युवाओं को आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास (Skill Development) और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने उनकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने पर भी विशेष जोर दिया।

इस गरिमामयी महासम्मेलन में मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके और प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित ब्रह्मकुमारी संस्थान के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

पंचतत्वों का सम्मान करता है आदिवासी समाज; पूरे देश के लिए प्रेरणा

प्रकृति और विकास के बीच संतुलन की वकालत करते हुए राष्ट्रपति ने आदिवासी जीवनशैली की सराहना की:

  • संस्कृति और विकास का संतुलन: उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति के बीच का संतुलन ही किसी भी समाज की वास्तविक ताकत होता है।

  • आध्यात्मिक मूल्य: जनजातीय समुदाय की जीवनशैली स्वाभाविक तौर पर आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित है।

  • प्रकृति से सामंजस्य: आदिवासी समाज प्रकृति के साथ अद्भुत सामंजस्य बनाकर जीता है और धरती, जल, वायु, आकाश और सूर्य-चंद्रमा जैसे पंचतत्वों का दिल से सम्मान करता है।

  • बैतूल के आदिवासियों की तारीफ: राष्ट्रपति ने कहा कि बैतूल के आदिवासी समुदाय ने अपनी लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और पारंपरिक ज्ञान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा है, जो पूरे देश के लिए एक महान प्रेरणा है।

वर्ष 2040 तक विकसित भारत के निर्माण का महा-संकल्प

महासम्मेलन के मंच से महामहिम राष्ट्रपति ने देश को एक बड़ा संकल्प दिलाया:

  • समावेशी विकास की नींव: उन्होंने वर्ष 2040 तक एक ऐसे विकसित भारत के निर्माण का आह्वान किया, जहां अध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला बनें।

  • मुख्यधारा में भागीदारी: यह महासम्मेलन जनजातीय समाज को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त भागीदारी देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बैतूल में ऐलान; आदिवासी समाज को आधुनिक शिक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग, 2040 तक विकसित भारत का संकल्प

  • जबलपुर आगमन (प्लान-बी तैयार): आपको बता दें कि आगामी योग दिवस (21 जून) पर भी राष्ट्रपति का जबलपुर आगमन होने जा रहा है, जहां बारिश की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने ‘प्लान-बी’ भी तैयार कर लिया है।

रासायनिक खाद छोड़ ‘प्राकृतिक खेती’ की ओर लौटे देश: राष्ट्रपति

खेती-किसानी और मानव स्वास्थ्य को लेकर भी राष्ट्रपति ने देश को सचेत किया:

  • केमिकल फर्टिलाइजर से नुकसान: रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizers) और विदेशी पेस्टीसाइड के अत्यधिक इस्तेमाल ने हमारी भूमि की उपजाऊ शक्ति और इंसानी स्वास्थ्य दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया है।

  • समय की मांग: अब देश को पुनः प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की ओर लौट रहे हैं, जो शरीर और मन दोनों के लिए परम लाभकारी है।

  • सर्वमंगलकारी सोच: प्रकृति से जुड़ाव और सर्वमंगलकारी सोच ही आदिवासी समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

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