
शेयर बाजार में बंपर तेजी की तैयारी: JPMorgan ने निफ्टी का टारगेट 27,000 रखा, पावर, ऑटो और डिफेंस सेक्टर बन सकते हैं नए ‘लीडर’
यश भारत। भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन (JPMorgan) की ओर से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अपनी नवीनतम ‘इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट’ में जेपी मॉर्गन ने मजबूत कॉर्पोरेट कमाई और देश के भीतर लगातार बढ़ रही घरेलू मांग के दम पर निफ्टी के लिए 27,000 अंकों का बेस-केस टारगेट बरकरार रखा है।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था इसी गति से आगे बढ़ती रही और स्थितियां अनुकूल रहीं, तो निफ्टी अपने ‘बुल-केस’ टारगेट 30,000 के ऐतिहासिक स्तर को भी छू सकता है। हालांकि, बाजार बिगड़ने (बेयर-केस) की स्थिति में निफ्टी के 20,500 के स्तर तक नीचे आने का जोखिम भी जताया गया है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में रिकॉर्ड मुनाफा
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के अनुसार, बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी और मध्यम स्तर की कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है:
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मिडकैप 100: एनर्जी सेक्टर को छोड़कर कंपनियों के टैक्स के बाद के शुद्ध मुनाफे (PAT) में सालाना आधार पर 42% की रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है।
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स्मॉलकैप 100: स्मॉलकैप कंपनियों के मुनाफे में भी 39% का बड़ा उछाल आया है।
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मजबूत सेक्टर्स: मटीरियल्स, यूटिलिटीज, इंडस्ट्रियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर्स ने इस तेजी को सबसे ज्यादा रफ्तार दी है।
ये 3 सेक्टर्स बनेंगे बाजार के नए ‘रॉकेट’
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पावर (Power Sector): देश में बिजली की पीक डिमांड बढ़कर 271 गीगावॉट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है। बढ़ते कैपिटल एक्सपेंडिचर और बिजली की मांग के कारण पावर शेयर मजबूत लीडर बनकर उभर सकते हैं।
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ऑटोमोबाइल (Auto Sector): वाहनों की घरेलू बिक्री में बढ़ोतरी और निर्यात (Exports) में सुधार से ऑटो कंपनियों को भारी फायदा पहुंच रहा है।
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डिफेंस (Defense Sector): रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और लगातार मिल रहे नए ऑर्डर्स के कारण यह सेक्टर मजबूती बनाए हुए है।
बाजार की तेजी के बीच छिपे दो बड़े खतरे
जेपी मॉर्गन ने निवेशकों को सचेत करते हुए बताया है कि इस तेजी के रास्ते में दो मुख्य जोखिम ब्रेक लगा सकते हैं:
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जियोपॉलिटिकल तनाव: दुनियाभर में विभिन्न देशों के बीच जारी रणनीतिक व राजनीतिक संघर्ष।
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मौसम की अनिश्चितता: मानसून और मौसम के चक्र में बदलाव से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ने वाला असर।








