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पन्ना के भगवान जगन्नाथ स्वामी पर लाखों का कर्ज, रथ यात्रा की तैयारियां हो रही हैं प्रभावित

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पन्ना। विश्व विख्यात जगन्नाथ स्वामी का मंदिर पन्ना में स्थित है, जहां 11 जून से रथ यात्रा की तैयारी शुरू होगी. वहीं, पूर्व में निकाली गई रथ यात्रा का भुगतान नहीं किया गया है जिससे मंदिर के सेवादाताओं पर कर्ज बना हुआ है. इससे आगामी तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं. जिस पर संयुक्त कलेक्टर ने बताया कि “नगर पालिका को मंदिर की जमीन पर बने टाउन हॉल से जो किराया मिलता है, उसी से आयोजन के लिए राशि उपलब्ध कराना है.”

 

3 साल से नहीं हुआ है भुगतान

 

श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर के कोषाध्यक्ष संदेश अग्रवाल बताते हैं कि “मंदिर पर करीब 2 से ढाई लाख रुपए का कर्ज बना हुआ है. यह कर्ज पूर्व में निकाली गई रथ यात्रा का है, जिसमें लाइटिंग, टेंट का सामान, प्रसाद, रंग-रोगन, पुताई और रथ की मरम्मत संबंधी खर्च है. जिसकी समस्त सूची प्रशासन को बना कर दी गई है, पर उसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है. इस कारण भगवान के ऊपर कर्ज बना हुआ है, जिसका पेमेंट प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है.”

मंदिर के पुजारी राकेश गोस्वामी का कहना है कि “ऐतिहासिक महोत्सव में सेवाएं देने वाले लोगों को बीते 3 साल से भुगतान नहीं हो पा रहा है. इससे आगे आने वाली महोत्सव की तैयारी भी प्रभावित हो रही है.”

रथ यात्रा की तैयारी 11 जून 2025 से शुरू हो जाएगी. इसमें भगवान अपने गर्भ गृह से बाहर निकलेंगे और बीमार पड़ जाएंगे. करीब 15 दिन भगवान बीमार रहेंगे और उनका औषधियों से उपचार होगा. इसके बाद 27 तारीख को रथ यात्रा निकलेगी, जिसमें रथ यात्रा जनकपुर जाएगी. इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में भगवान की एक झलक पाने को हजारों की संख्या में भक्त पन्ना पहुंचते हैं.

3 साल से भुगतान नहीं मिलने के मामले को लेकर संयुक्त कलेक्टर कुशल कुमार गौतम ने कहा, “नगर पालिका प्रशासन को आयोजन के लिए राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान है. नगर पालिका को मंदिर की जमीन पर बने टाउन हॉल से जो किराया मिलता है, उसी किराए से नगर पालिका प्रशासन को आयोजन के लिए राशि उपलब्ध कराना है.”

 

जगन्नाथ पुरी से लेकर आए थे प्रतिमा

 

यह एक ऐतिहासिक मंदिर है जिसकी स्थापना पन्ना के राजवंश परिवार द्वारा करवाई गई थी. बताया जाता है कि तत्कालीन पन्ना के नरेश किशोर सिंह जूदेव को स्वप्न आया था. जिसमें भगवान ने उनको जगन्नाथ पुरी से अपनी प्रतिमा पन्ना ले आने को कहा था. जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर की स्थापना कराई. बताया जाता है कि इसकी स्थापना 176 साल पहले हुई थी. आज भी पन्ना के महाराज को आमंत्रित किया जाता है और आरती में वे चावर डुलाते हैं.

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