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Pranav Mukherjee in Memory: पीएम मोदी भी छूते थे पूर्व राष्ट्रपति प्रण बदा के पांव, देखें- यादगार तस्वीरें

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नई दिल्ली । देश के पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी नहीं रहे। मस्तिष्क में खून का थक्का बन जाने के कारण उन्हें 10 अगस्त को अस्पताल में भर्ती किया गया था। सर्जरी से पहले उनकी कोरोना जांच भी कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद लगातार उनकी तबीयत बिगड़ रही थी। वह पिछले काफी दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

आखिरकार आज उन्‍होंने अंतिम सांस ली। राजनीति में एक लंबा समय बिताने वाले पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी की छवि ऐसी थी कि हर पार्टी के नेता उनका सम्‍मान करता था। उनका पार्थिव शरीर आज आरआर अस्पताल में ही रहेगा। कल 10 राजाजी मार्ग स्थित निवास स्थान पर पार्थिव शरीर रखा जाएगा।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नहीं रहे। उनके निधन पर पीएम मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर उनके पैर छूते हुए फोटो शेयर किया है। पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि वे बेहतरीन स्कॉलर थे। राजनीतिक समुदाय में हर कोई उनका सम्मान करता था।

पीएम मोदी ने लिखा कि भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन पर बहुत दुख हुआ। उन्होंने हमारे राष्ट्र के विकास पथ पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उत्कृष्टता से एक विद्वान, एक राजनेता, वह राजनीतिक स्पेक्ट्रम भर में और समाज के सभी वर्गों द्वारा प्रशंसा की गई थी। वह एक विद्वान व्यक्ति और अच्छे राजनेता थे। समाज का हर वर्ग उनकी प्रशंसा करता था।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रणब मुखर्जी के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि मैं पूरे देश के साथ शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 84 वर्ष के थे। लोग उन्हें प्यार व सम्मान से ‘प्रणब दा’ बुलाते थे। प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में 2012 से 2017 तक पद पर रहे। पूर्व राष्ट्रपति को भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के साथ प्रणब दा।

प्रणब मुखर्जी का लंबा राजनीतिक जीवन रहा है। इस दौरान उन्‍होंने कई उतार-चढ़ाव भी देखे। कांग्रेस के ही नहीं बल्कि दूसरी पार्टी के नेताओं से भी उनका गहरा लगाव था। भारत के 13वें राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी देश का सबसे चर्चित चेहरा थे। उनके जीवन का लंबा वक्‍त राजनीति में ही गुजरा।

समकालीन भारतीय राजनीति में ‘इनसाइक्लोपीडिया’ माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा के पैरोकार राजनेताओं की पीढ़ी के आखिरी स्तंभ थे।

 

1995में नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ पूर्व ब्रिटिश प्रधान मंत्री मार्गरेट थैचर।

 

 

 

 

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