Plastic Currency in India: ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का होगा फील्ड ट्रायल, सरकार ने दी मंजूरी; जानें क्या बंद होंगे कागजी नोट?
नई दिल्ली: भारत में जल्द ही ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट हाथों में नजर आ सकते हैं। भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत प्रायोगिक तौर पर (Field Trial) ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलीमर नोट चलन में लाए जाएंगे।
आरबीआई की मुद्रा मुद्रण शाखा ‘भारतीय रिजर्व बैंक नोट प्रिंटिंग लिमिटेड’ (BRBNMPL) ने इसके लिए वैश्विक टेंडर (EOI) भी आमंत्रित किए हैं। हालांकि, इस फैसले के बाद फैली अफवाहों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि मौजूदा कागजी नोट बंद नहीं होंगे और पॉलीमर नोट कागजी मुद्रा के साथ-साथ चलन में रहेंगे।
क्यों पड़ी पॉलीमर नोटों की जरूरत और क्या हैं इसके फायदे?
संसद में जानकारी देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि पॉलीमर नोटों को पेश करने का मुख्य उद्देश्य बैंक नोटों की उम्र बढ़ाना है, न कि कागजी करेंसी को हटाना:
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लंबी उम्र और टिकाऊपन: कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट 2 से 6 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोट बार-बार हाथों में बदलने से जल्दी फटते या खराब होते हैं, जिसे प्लास्टिक नोटों से रोका जा सकता है।
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लागत और पर्यावरण में बचत: हालांकि प्लास्टिक नोटों की शुरुआती छपाई लागत अधिक होती है, लेकिन इनकी लंबी उम्र के कारण बार-बार छपाई, परिवहन और रिप्लेसमेंट का खर्च काफी घट जाता है।
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पर्यावरण के अनुकूल: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीमर नोट ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को 32% और ऊर्जा की खपत को 30% तक कम करते हैं। साथ ही, खराब होने के बाद इन्हें रीसाइकिल कर प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं। Plastic Currency in India: ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का होगा फील्ड ट्रायल, सरकार ने दी मंजूरी; जानें क्या बंद होंगे कागजी नोट?
डिजिटल भुगतान और कागजी मुद्रा पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
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पूरक व्यवस्था: फिजिकल करेंसी (कागजी/पॉलीमर नोट) और डिजिटल पेमेंट (UPI आदि) एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम करेंगे।
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अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड: दुनिया के लगभग 60 देश (जैसे ऑस्ट्रेलिया, यूके, कनाडा, सिंगापुर और वियतनाम) पहले से ही किसी न किसी रूप में पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं।








