PhD स्कॉलर ने Governor RN Ravi से डिग्री लेने से किया इंकार, राज्यपाल और छात्रा के बीच विवाद बढ़ा

PhD स्कॉलर ने Governor RN Ravi से डिग्री लेने से किया इंकार, राज्यपाल और छात्रा के बीच विवाद बढ़ा

PhD स्कॉलर ने Governor RN Ravi से डिग्री लेने से किया इंकार, राज्यपाल और छात्रा के बीच विवाद बढ़ा। तमिलनाडु की एक पीएचडी स्कॉलर ने राज्यपाल आर.एन. रवि से अपनी डिग्री लेने से इनकार कर दिया। छात्रा का आरोप है कि राज्यपाल ने तमिलनाडु के हितों के खिलाफ काम किया है. इससे राज्यपाल और छात्रा के बीच विवाद बढ़ गया है. छात्रा ने विश्वविद्यालय के कुलपति से डिग्री प्राप्त की. पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

 

तमिलनाडु की पीएचडी स्कॉलर ने प्रदेश के राज्यपाल आरएन रवि के हाथों डिग्री लेने से मना कर दिया. छात्रा ने मंच पर राज्यपाल के बजाय यूनिवर्सिटी के कुलपति चंद्रशेखरन के हाथों डिग्री ली. ऐसा करने के पीछे का कारण छात्रा ने बताया कि राज्यपाल ने तमिलनाडु के हितों के खिलाफ काम किया है. यही कारण है कि छात्रा ने राज्यपाल से डिग्री नहीं ली।

डिग्री न लेने वाली महिला DMK के नागरकोइल डिप्टी सेक्रेटरी एम. राजन की पत्नी हैं. जीन जोसेफ डिग्री लेने के बाद थैंक यू कहती हैं, जिस पर राज्यपाल सिर हिलाकर जवाब देते हैं. राज्यपाल ने DMK सरकार के 10 बिल रोक दिए थे. इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार दोनों ने ही नाराजगी जाहिर की थी.

डिग्री न लेने को लेकर छात्रों ने क्या कहा?

मनोनमनियम सुंदरनार यूनिवर्सिटी की छात्रा जीन जोसेफ ने राज्यपाल के बजाय यूनिवर्सिटी के कुलपति एम. चंद्रशेखर से डिग्री ली है. इसको लेकर छात्रा ने कहा कि राज्यपाल के काम तमिलनाडु और उसकी संस्कृति के प्रति पक्षपातपूर्ण रहे हैं. छात्रा ने इसका विरोध करने के लिए ही डिग्री राज्यपाल के हाथों नहीं ली है.

राज्यपाल और सरकार के बीच रहा विवाद

राज्यपाल आरएन रवि की नियुक्ति 2021 में हुई थी. तभी से ही वे कई बार अपने फैसलों को चर्चा में रहे हैं. कार्यकाल की शुरुआत के दौरान ही उन्होंने एक कार्यक्रम में जय श्री राम का नारा लगवा दिया था. इसके अलावा साल 2023 में राज्य सरकार के 12 में से 10 बिलों को वापस विधानसभा में लौटा दिया था और बाकी के 2 बिलों को राष्ट्रपति के पास भेज दिया था.

यह तनाव तब और बढ़ गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए हुए कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास ऐसे मामलों में कोई विवेकाधीन शक्तियां नहीं हैं, बल्कि उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही काम करना चाहिए. ऐसे कई मामले रहे हैं जब राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तकरार देखने को मिली है. ऐसा पहली बार है जब किसी सार्वजनिक मंच पर राज्यपाल को अपने फैसलों के कारण विरोध का सामना करना पड़ा हो.

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