भगवान चित्रगुप्त जी की भव्य शोभायात्रा एवं प्राकट्य उत्सव में उमड़ा जनसैलाब,कटनी में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का अद्भुत संग
कटनी। शहर में भगवान चित्रगुप्त जी का प्राकट्य उत्सव कायस्थ समाज द्वारा बड़े ही धूमधाम, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में भगवान चित्रगुप्त जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
शोभायात्रा का शुभारंभ श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर से हुआ, जहां से सजे-धजे रथ, आकर्षक झांकियां और भजन मंडलियों के साथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों द्वारा शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। भजन-कीर्तन और भगवान चित्रगुप्त जी के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। झांकियों में भगवान चित्रगुप्त जी के जीवन प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े।
इस शोभायात्रा की विशेषता यह रही कि इसमें महिलाओं की बड़ी संख्या में सक्रिय सहभागिता रही। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में भजन-कीर्तन करते हुए शामिल हुईं, वहीं बच्चों और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे पूरे आयोजन में विशेष ऊर्जा और उत्साह का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर कई गणमान्य नागरिकों की विशेष उपस्थिति रही। शोभायात्रा में भोपाल के पूर्व सांसद आलोक संजर, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक टण्डन सोनी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष एडवोकेट अमित शुक्ला, पूर्व महापौर शशांक श्रीवास्तव, ओ.पी. निगम, अनिल खरे, रवि खरे, राजू खरे, आशीष तिवारी, सुनील उपाध्याय, रजनी वर्मा, हेमंत श्रीवास्तव, अनादि निगम, पंकज निगम, शिशिर श्रीवास्तव, मनोज निगम, राकेश श्रीवास्तव, शैलेश श्रीवास्तव, पवन श्रीवास्तव, आशु वर्मा, प्रवीण श्रीवास्तव, दिनेश निगम, प्रदीप श्रीवास्तव, रवि श्रीवास्तव, अजय खरे,पत्रकार अजय खरे, संजय खरे, रविंद्र बक्शी, नवनीत श्रीवास्तव, आमोघ श्रीवास्तव, प्रवीण सक्सेना, आदित्य राज निगम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार एवं उद्योगपति शामिल हुए।
शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
शोभायात्रा का समापन स्थानीय जगन्नाथ चौक स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर में किया जाएगा, जहां प्रसाद वितरण का आयोजन भी होगा।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का भी सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।

