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पेंशनभोगियों को भविष्य में जीवित होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं, ऐसे होगा वेरिफिकेशन

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पेंशनभोगियों के लिए बहुत जरूरी खबर आई है। मीडिया सूत्रों के अनुसार पेंशनभोगियों को भविष्य में जीवित होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार एक अलग योजना लेकर आई है।

पेंशनभोगी अगर हर साल जीवित होने का प्रमाण नहीं देते थे, तो उनकी पेंशन बंद कर दी जाती थी। लेकिन अब पेंशनभोगियों को इस झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।

केंद्र सरकार जल्द ही पेंशनभोगियों के लिए फेस रिकॉग्निशन सिस्टम नाम की हाईटेक तकनीक लाने जा रही है।

नई तकनीक के मुताबिक पेंशनभोगी का चेहरा ही इस बात का सबूत होगा कि वह जीवित है। नई तकनीक का अनावरण राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने किया।

फेस रिकॉग्निशन तकनीक क्या है?

इसके मुताबिक बैंक को लिखित में जीवित होने का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। बैंक अधिकारी मोबाइल ऐप के जरिए पेंशनभोगियों के चेहरे का सत्यापन करेंगे।

चेहरे की स्कैनिंग पूरी होते ही संबंधित पेंशनभोगी एप्लीकेशन में रजिस्टर हो जाएगा। यह उसके जीवित होने का डिजिटल प्रमाण होगा।

कई पेंशनभोगी वृद्धावस्था के कारण बैंक नहीं जा पाते हैं। ऐसे में यह नई तकनीक निश्चित रूप से पेंशनभोगियों के लिए उपयोगी होगी।

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