किडनी रैकेट का शिकार बनी पारुल की हालत सुधरी, इलाज के बाद किडनी ने किया काम, कानपुर में सामने आए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में पीड़ित पारुल तोमर की सेहत में अब सुधार देखा जा रहा है। इलाज के बाद उनकी प्रत्यारोपित किडनी धीरे-धीरे काम करने लगी है और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर भी कम हुआ है, जो स्वास्थ्य में सुधार का संकेत है।
किडनी रैकेट का शिकार बनी पारुल की हालत सुधरी, इलाज के बाद किडनी ने किया काम
डॉक्टरों के अनुसार, किडनी अब शरीर में फिल्ट्रेशन का काम शुरू कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसप्लांट के दौरान कई गंभीर लापरवाहियां बरती गई थीं, जो मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती थीं।
नियमों को ताक पर रखकर किया गया ट्रांसप्लांट
जांच में सामने आया है कि ट्रांसप्लांट से पहले जरूरी इम्युनोलॉजिकल टेस्ट, जैसे HLA एंटीजन जांच, नहीं कराई गई। यह जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे यह पता चलता है कि नई किडनी शरीर में स्वीकार होगी या नहीं।
इसके अलावा ऑपरेशन के बाद भी जरूरी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और मरीज के परिजनों को इलाज से जुड़े दस्तावेज तक नहीं दिए गए।
अस्पताल में सीमित सुविधाएं
डॉक्टरों ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को खास यूनिट (KTU) में रखकर इलाज करना चाहिए, लेकिन संबंधित अस्पताल में ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। फिलहाल पारुल का इलाज जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
साइबर गिरोह से जुड़े तार
मामले की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस किडनी रैकेट के तार साइबर अपराधियों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को पता चला है कि डोनर को पहले म्यूल अकाउंट खोलने का लालच दिया गया था, बाद में उसने किडनी डोनेट करने का फैसला किया।
पुलिस ने जारी किए सख्त निर्देश
घटना के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। अब सभी नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों को 60 दिन तक का CCTV बैकअप रखना अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही लाइसेंस, डॉक्टरों की जानकारी और इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने होंगे।
आगे की स्थिति
फिलहाल पारुल की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा। वहीं, इस मामले ने अवैध ट्रांसप्लांट और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
