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Parliament Monsoon Session: आइशी घोष की तलाश में CPI(M) दफ्तर पहुंची पुलिस- राज्यसभा में भारी हंगामा, खरगे बोले- ‘लोकतंत्र खतरे में’, नड्डा का पलटवार

Parliament Monsoon Session: आइशी घोष की तलाश में CPI(M) दफ्तर पहुंची पुलिस- राज्यसभा में भारी हंगामा, खरगे बोले- 'लोकतंत्र खतरे में', नड्डा का पलटवार

Parliament Monsoon Session: आइशी घोष की तलाश में CPI(M) दफ्तर पहुंची पुलिस- राज्यसभा में भारी हंगामा, खरगे बोले- ‘लोकतंत्र खतरे में’, नड्डा का पलटवार

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और साल 2021 के एक पुराने मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच तनातनी बढ़ गई है। मंगलवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम SFI नेता और जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष की तलाश में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजनीतिक दल CPI(M) के मुख्यालय (एकेजी भवन) पहुंच गई।

पुलिस की इस कार्रवाई का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठा, जिसके बाद सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस और भारी हंगामा देखने को मिला।

 गैर-जमानती वारंट और फोन पर वारंट देने का आरोप

  • 2021 का मामला: दिल्ली पुलिस के अनुसार, साल 2021 के जेएनयू प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में अदालत में पेश न होने के कारण आइशी घोष के खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी किया है। पुलिस कोर्ट के आदेश की तामील कराने के लिए उन्हें तलाश कर रही थी।

  • आइशी घोष का दावा: आइशी घोष का कहना है कि पुलिस ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से वारंट सौंपने के बजाय फोन पर इसकी जानकारी दी, जो कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का असली मकसद जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में शामिल युवाओं में खौफ पैदा करना है।

 राज्यसभा में हंगामा: “लोकतंत्र खतरे में” vs “कानून का पालन”

राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने पार्टी दफ्तर में सादे कपड़ों में पुलिस के घुसने का मुद्दा उठाया।

  • विपक्ष का हमला: नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ब्रिटास का समर्थन करते हुए कहा कि एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी के दफ्तर में बिना इजाजत पुलिस का जाना लोकतंत्र पर हमला है।

  • जेपी नड्डा का जवाब: केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “यह एक सामान्य कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है। पुलिस अदालत के आदेश और कानून के तहत काम कर रही है।” नड्डा ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान उन्हें भी दो बार क्लास से गिरफ्तार किया गया था, इसलिए राजनीति और आंदोलनों में शामिल होने पर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।

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