Panchayat Elections: प्रदेश में उपचुनाव करवाए जा सकते हैं तो फिर पंचायत चुनाव कराने में क्या दिक्कत-HC
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Panchayat Elections । इंदौर हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि जब 28 सीटों पर उपचुनाव करवाए जा सकते हैं तो फिर पंचायत उपचुनाव करवाने में क्या दिक्कत है। कोर्ट ने सरकार से यह सवाल उस जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पूछा है जिसमें प्रदेश में पंचायत चुनाव में हो रही लेटलतीफी का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता की मांग है कि शासन को आदेश दिया जाए कि वह पंचायत चुनाव करवाए।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका धार के सरदारपुर निवासी तोलाराम गामड ने एडवोकेट प्रतीक माहेश्वरी के माध्यम से दायर की है। इसमें कहा है कि प्रदेश में पंचायतों के चुनाव सितंबर 2019 से लंबित हैं। सरकार कोरोना महामारी के नाम पर पंचायत चुनाव टाल रही है लेकिन दूसरी तरफ प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव करवाए गए हैं।
इसके अलावा भी देश में कई प्रदेशों के विधानसभा चुनाव हुए हैं। प्रदेश सरकार जब विधानसभा सीटों पर उपचुनाव करवा सकती है तो फिर उसे पंचायत चुनाव कराने में क्या दिक्कत है। याचिका में यह भी कहा है कि प्रदेश में कोरोना का प्रकोप शहरों के मुकाबलें गांवों में बहुत कम है।
पंचायत चुनाव भी गांवों में होना हैं। पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। संविधान भी कहता है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के पहले ही चुनाव करवाए जाना चाहिए। याचिका में मांग की गई है कि प्रदेश में तुरंत पंचायत चुनाव करवाए जाने के आदेश दिए जाएं। सोमवार को जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष याचिका की सुनवाई हुई। कोर्ट ने शासन से कहा है कि वह दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करें। मामले में अब दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।