बिना दर्द वाली गांठ भी हो सकती है ब्रेस्ट कैंसर: डॉ. रजत बजाज ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
नोएडा: भारत में महिलाओं के बीच स्तन कैंसर (Breast Cancer) के मामले चिंताजनक रफ्तार से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में कैंसर से पीड़ित लगभग 60 प्रतिशत महिलाओं में इस बीमारी का पता गंभीर और एडवांस्ड स्टेज पर चलता है, जिससे इलाज बेहद कठिन हो जाता है।फोर्टिस अस्पताल (नोएडा) के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. रजत बजाज के अनुसार, महिलाओं में यह धारणा सबसे बड़ी गलतफहमी है कि अगर स्तन में गांठ है और उसमें दर्द नहीं हो रहा, तो वह खतरनाक नहीं है।
दर्द न होना ही सबसे बड़ा धोखा है: डॉक्टर्स का मत
डॉ. रजत बजाज ने स्पष्ट किया कि ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती अवस्था में बनने वाली गांठ में लगभग कभी दर्द नहीं होता। भारतीय समाज में दर्द को ही खतरे की निशानी माना जाता है, जिसके कारण महिलाएं बिना दर्द वाली सूजन या गांठ को नजरअंदाज कर देती हैं और बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती है। बिना दर्द वाली गांठ भी हो सकती है ब्रेस्ट कैंसर: डॉ. रजत बजाज ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
महिलाएं क्यों देर से पहुंचती हैं डॉक्टर के पास?
भारतीय महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य से ऊपर घर और परिवार के सदस्यों की सेहत व जिम्मेदारियों को रखती हैं। पारंपरिक सोच के कारण महिलाएं अपने शरीर में आने वाले बदलावों पर खुलकर बात करने या डॉक्टर को दिखाने में संकोच करती हैं। ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में सेल्फ-एग्जामिनेशन (स्वयं जांच) की सही जानकारी और ‘मैमोग्राम’ (Mammogram) जैसी बुनियादी जांच सुविधाओं का अभाव है।
कब और कैसे करें स्वयं जांच (Self-Examination)?
डॉक्टर ने सलाह दी है कि हर महिला को प्रति माह माहवारी (Periods) समाप्त होने के बाद केवल 5 मिनट निकालकर आईने के सामने खुद की जांच करनी चाहिए।
मुख्य लक्षण जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए:
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स्तन या बगल (Underarm) में किसी भी प्रकार की नई, सख्त या बिना दर्द वाली गांठ।
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स्तन के आकार, बनावट या त्वचा में असामान्य बदलाव।
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निप्पल का अंदर की ओर धंसना या उससे किसी भी प्रकार का असामान्य स्राव (Discharge) होना।
कैंसर विशेषज्ञ की अपील है कि किसी भी प्रकार की गांठ दिखने पर घबराएं नहीं और न ही इसे छिपाएं। समय पर पहचान और त्वरित इलाज से मरीज की जान बचाई जा सकती है।

