रिटायरमेंट के बाद 23.93 लाख की वसूली का आदेश रद्द, फिर भी पालन नहीं: राज्य सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर

रिटायरमेंट के बाद 23.93 लाख की वसूली का आदेश रद्द, फिर भी पालन नहीं: राज्य सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर
जबलपुर। सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद कर्मचारी से लाखों रुपये की वसूली का आदेश हाई कोर्ट से निरस्त होने और सुप्रीम कोर्ट से भी राज्य सरकार की एसएलपी (SLP) खारिज होने के बावजूद आदेश का पालन न करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की गई है।
क्या है पूरा मामला?
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रिटायरमेंट के बाद वसूली: सागर निवासी याचिकाकर्ता 31 मई 2020 को अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके करीब एक महीने बाद 26 जून 2020 को संबंधित विभाग ने उनके खिलाफ ₹23,93,830 रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया।
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हाई कोर्ट ने दी थी राहत: याचिकाकर्ता ने इस अनुचित वसूली आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां से अदालत ने सुनवाई के बाद वसूली के आदेश को पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट में भी खारिज हुई SLP: हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का रुख किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया।
न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर कानूनी कार्रवाई
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा और जितेंद्र गर्ग ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि शीर्ष अदालत से राहत मिलने के बाद भी संबंधित विभाग और अधिकारियों द्वारा अब तक कर्मचारी को उनकी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है, जो कि सीधे तौर पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और ब्याज सहित राशि के भुगतान की मांग की गई है। रिटायरमेंट के बाद 23.93 लाख की वसूली का आदेश रद्द, फिर भी पालन नहीं: राज्य सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर








