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केवल शिक्षकों पर ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता बर्दास्त नहीं होगी,शिक्षकों के मोर्चा को अधिकारी -कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संघ का खुला समर्थन

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कटनी। मध्यप्रदेश शासन द्वारा सिर्फ और सिर्फ शिक्षकों पर थोपे जा रहे, ई-अटेंडेंस के विरोध में गत दिवस शिक्षकों के संयुक्त -संघो ने पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालयों में किये गये प्रदर्शनों की कड़ी में कटनी कलेक्ट्रेड ऑफिस के बाहर भी जिले भर से आये सैकड़ो शिक्षकों द्वारा जंगी प्रदर्शन कर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन कटनी को ज्ञापन सौंपा गया.इस दौरान भारी गर्मी भरी उमस की परवाह किये बगैर जिले के सैकड़ो शिक्षक अपने मान -सम्मान की रक्षा हेतु शहर से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचकर गगनभेदी नारेबाजी के बीच अपना विरोध दर्ज कराये।

अब शिक्षक संवर्ग अपना अपमान बर्दाश्त कतई नहीं करेगा.

इस अवसर पर शिक्षकों का मनोबल बढ़ाने हेतु अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय प्रवक्ता कुंवर मार्तण्ड सिंह राजपूत द्वारा उक्त विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनते हुए राज्य शासन की शिक्षक विरोधी मानसिकता की जमकर आलोचना की गयी.प्रेस को जारी नोट्स में उन्होंने सरकार को दो टूक शब्दों में स्पष्ट संदेश दिये, कि अब शिक्षक संवर्ग अपना अपमान बर्दाश्त कतई नहीं करेगा. राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षकों पर ई-अटेंडेंस थोपना,उनके सम्मान के खिलाफ है। अगर यह व्यवस्था जरूरी है, तो शिक्षकों के स्थान पर सभी विभागों में लागू करने के उपरांत ही इसका रूख शिक्षा विभाग तरफ मोड़ने का प्रस्ताव उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को ई-मेल के माध्यम से दिये . प्रवक्ता द्वारा शासन से सवाल किया गया कि, क्या अन्य विभागों के कर्मचारी की तुलना में सिर्फ और सिर्फ शिक्षक ही नकारा और बेईमान हैँ?,क्योंकि हर बार शिक्षकों को ही कठघरे में खड़ा करना और शिक्षा विभाग को हर तरह कि प्रयोगशाला बनाकर आये दिन शिक्षकों का लिटमस टेस्ट लेना, क्या शासन की शिक्षकों के प्रति अच्छी धारणा पर सवाल खड़ा नहीं करता है

यह व्यवस्था शिक्षकों के सम्मान पर कारारी चोट

शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किये कि, यह व्यवस्था शिक्षकों के सम्मान पर कारारी चोट है। इस प्रणाली के लागू होने से उनकी कार्यशैली और ईमानदारी पर संदेहऔर भ्रम से समाज में गुरुजनों के सम्मान को गहरा आघात पहुँच रहा है .
जिसे लेकर शिक्षक अपने आपको अभी से ही ठगा सा महसूस कर रहा है .शिक्षकों ने इसे शिक्षकों की चौकीदारी प्रणाली की संज्ञा देते हुए अपने आपको अपमानित करने वाला शासकीय आदेश को तुरंत वापिस लेने का दबाब बनाये हैँ ।उन्होंने स्पष्ट किये कि इससे पहले भी कई जिलों में ऑनलाइन हाजिरी भरते समय शिक्षकों के साथ अनेकों अनेक दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें कुछ शिक्षकों की जान भी जा चुकी है.प्रदेश के यसस्वी मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि, इसे या तो प्रदेश के सभी 52 विभागों में एक साथ लागू की जाये या फिर ई-अटेंडेंस का आदेश तुरंत वापिस लिया जावे, तभी प्रदेश का शिक्षक चैन से अपना शैक्षणिक कार्य करेगा, अन्यथा शिक्षकों के मान सम्मान की लड़ाई आने वाले समय में भयावह होने के संकेत भी विरोध प्रदर्शन के दौरान दिये गये हैं .

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