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130 साल पुराने बांध से एक करोड़ लोगों को खतरा: मुल्लापेरियार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश से हाईकोर्टों में बड़ा फेरबदल, 21 जजों के तबादले की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश से हाईकोर्टों में बड़ा फेरबदल, 21 जजों के तबादले की तैयारी

130 साल पुराने बांध से एक करोड़ लोगों को खतरा: मुल्लापेरियार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, तमिलनाडु और केरल सरकारों तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को नोटिस जारी किया है. यह एक जनहित याचिका (PIL) पर कार्रवाई है, जिसमें 130 साल पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिरता पर चिंताओं के बीच इसे बदलने के लिए नया बांध बनाने की मांग की गई है।

चीफ जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने सेव केरल ब्रिगेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया कि ब्रिटिश काल के इस बांध के आसपास 1 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं।

चीफ जस्टिस (CJI) ने कहा कि मौजूदा बांध को मजबूत करने के लिए कुछ दिशा-निर्देशों के मानने की जरूरत हो सकती है. उन्होंने आगे सुझाव दिया कि इस मामले की जांच एक विशेषज्ञ समिति की तरफ से कराई जाए, ताकि बांध की सुरक्षा पहलुओं और नए ढांचे के निर्माण की संभावना का आकलन किया जा सके।

1895 में बना था ये बांध

मुल्लापेरियार बांध को 1895 में केरल के इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर बनाया गया था. तमिलनाडु की एक लीज समझौते के तहत संचालित किया जाता है. यह लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, जहां केरल इसकी उम्र और भूकंपीय जोखिम के कारण सुरक्षा चिंताएं जता रहा है।

जबकि, तमिलनाडु इसके दक्षिणी जिलों के लिए सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के महत्व पर जोर देता है. वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए, उन्होंने तर्क दिया कि इस पुराने बांध से केरल में नीचे की ओर रहने वाले लगभग 1 करोड़ लोगों की जान और संपत्ति को गंभीर खतरा है।

कोर्ट से नया बांध बनाने का निर्देश देने की अपील की, ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. इस जनहित याचिका (PIL) में केंद्र सरकार, तमिलनाडु और केरल सरकारों तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को प्रतिवादी बनाया गया है.

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