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एक तरफ जनगणना, दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा: विदिशा में शिक्षक बने ‘सुपरमैन’, परीक्षा केंद्र और फील्ड के बीच चकराया सिर

एक तरफ जनगणना, दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा: विदिशा में शिक्षक बने 'सुपरमैन', परीक्षा केंद्र और फील्ड के बीच चकराया सिर

एक तरफ जनगणना, दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा: विदिशा में शिक्षक बने 'सुपरमैन', परीक्षा केंद्र और फील्ड के बीच चकराया सिर

एक तरफ जनगणना, दूसरी तरफ बोर्ड परीक्षा: विदिशा में शिक्षक बने ‘सुपरमैन’, परीक्षा केंद्र और फील्ड के बीच चकराया सिर। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में इन दिनों शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। जिले में एक साथ शुरू हुई जनगणना 2027 और बोर्ड की द्वितीय परीक्षा ने शिक्षकों की दिनचर्या को बेपटरी कर दिया है। प्रशासन ने कई शिक्षकों की ड्यूटी दोनों ही महत्वपूर्ण कार्यों में एक साथ लगा दी है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से बेहाल हो रहे हैं।

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140 किमी का सफर और दोहरी जिम्मेदारी

सबसे चौंकाने वाला मामला बरेठ हायर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षक शिवमंगल सिंह शाक्य का है। प्रशासनिक आदेशों के फेर में फंसे शाक्य को दो ऐसी जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनके बीच की दूरी 70 किलोमीटर है:

  1. पहली ड्यूटी: बोर्ड परीक्षा के लिए विदिशा के बरईपुरा स्थित सांदीपनि स्कूल में केंद्राध्यक्ष

  2. दूसरी ड्यूटी: गंजबासौदा तहसील के बरेठ क्षेत्र में जनगणना कार्य के लिए सुपरवाइजर

सुबह 5 बजे से शुरू होती है ‘अग्निपरीक्षा’

दोहरी ड्यूटी निभाने के लिए शिक्षक शाक्य को प्रतिदिन सुबह 5 बजे गंजबासौदा से निकलना पड़ता है ताकि वे 7 बजे तक विदिशा परीक्षा केंद्र पहुंच सकें। परीक्षा संपन्न कराने के बाद दोपहर में वे फिर वापस गंजबासौदा के ग्रामीण क्षेत्रों में जनगणना कार्य के लिए दौड़ते हैं। रोजाना 140 किलोमीटर का सफर तय करना उनकी सेहत और सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

10 से अधिक शिक्षक परेशान

यह समस्या सिर्फ एक शिक्षक की नहीं है, बल्कि जिले के 10 से अधिक शिक्षक इसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि एक ही समय पर दो जगह उपस्थिति दर्ज कराना व्यावहारिक रूप से असंभव है, लेकिन प्रशासन के आदेश के डर से वे यह जोखिम उठाने को मजबूर हैं।

शिक्षक संघ की मांग: शिक्षकों ने मांग की है कि जनगणना जैसे समय लेने वाले कार्य और बोर्ड परीक्षा की संवेदनशील जिम्मेदारी में से किसी एक कार्य से उन्हें मुक्त किया जाए, ताकि वे अपने काम के साथ न्याय कर सकें।

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