Saturday, May 2, 2026
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मजदूर दिवस पर आयुध निर्माणी मे आयुधवरिष्ठ नागरिक परिषद ने ध्वजारोहण किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई 

मजदूर दिवस पर आयुध निर्माणी मे आयुधवरिष्ठ नागरिक परिषद ने ध्वजारोहण किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई

 

कटनी। मजदूरों के अंतर्राष्टीय पर्व मई दिवस के अवसर पर मई, शुक्रवार को सुबह 9 बजे निर्माणी पूर्वी क्षेत्र स्थित यूनियन मंच पर मजदूर संघ, आ फै कर्मचारी यूनियन और वरिष्ठ नागरिक परिषद ने ध्वजारोहण किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर वरिष्ठ नेता एम एल राजपूत एवं शेख मुस्ताक् जी ने मई दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला एवं सरकार की पूंजीवादी नीतियों को जमकर कोसा। आ फै कर्मचारी यूनियन के रजनीश शर्मा ने कहा कि, वर्तमान सरकार 4 नये श्रम कानूनों, निगमीकरण एवं निजीकरण के रास्ते मजदूरों पर कुठाराघात कर रही है। ए आई डी ई एफ के शिव पाण्डेय ने कर्मचारियों को मजदूर दिवस की शुभकामना देते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि, मई दिवस 2026 वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे दौर मैं आयोजित हो रहा है जब विश्व पूंजीवादी संकट चरम पर है। उसके भीतर की छटपटाहट एक तरह से ढांचाघट संकट पैदा कर रहा है। ऐसे में भारत के मई दिवस के अवसर पर श्रमिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह विचारणीय है कि, भारत सरकार द्वारा 29 श्रम कानून को समाहित करके नए चार श्रम कोड जो 21 नवंबर 2025 सै प्रभावी कर दिए गए हैं, जो कर्मचारी के हित में नहीं है। वेतन संहिता 2019 – यह न्यूनतम मजदूरी और मजदूरों के समय पर भुगतान से संबंधित है। औद्योगिक संबंध संहिता 2020- यह ट्रेड यूनियन औद्योगिक विवाद और काम की स्थितियों से संबंधित है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020- यह पीएफ, ई एस आई, पेंशन और जिग/ “प्लेटफार्म वर्क्स” की सुरक्षा से संबंधित है।

व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य संहिता 2020 – यह कार्य स्थल पर सुरक्षा स्वास्थ्य और काम करने के घंटौ से संबंधित है।

श्रमिक संगठन द्वारा इसका निरंतर विरोध किया जा रहा है कि, यह पूंजीपतियों को मन-मानी करने, काम के समय की सीमा 8 घंटे से 12 घंटे किए जाने, श्रम संगठनो के अधिकारों “हड़ताल” “प्रदर्शन” आदि पर रोक लगाने की एक बड़ी सोची समझी योजना है। जिसका श्रम संगठनों द्वारा निरंतर विरोध किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजदूर दिवस 1 मई को मनाया जाता है। मई दिवस की नींव अमेरिका में 1886 में शिकागो में हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल जिसमें कार्य दिवस मैं 8 घंटे की मांग को लेकर की गई थी। परंतु पूंजीपतियों द्वारा शांति पूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं मजदूरों पर हे-मार्केट स्क्वायर हिंसक घटना गोलीबारी मैं जिसमें आठ मजदूर साथियों को अपनी जान की आहुति देनी पड़ी। जिस सुलह कै सफेद झंडे को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था, वह कर्मचारियों के खून से रंग कर लाल हो गया और तभी से मजदूरों का झंडा लाल बन गया। हालांकि 1886 के आंदोलन के बाद कई कारखाने में दबाव के कारण 8 या 9 घंटे के काम को अपनाया गया। परंतु कानूनी रूप से अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर 1937‐ 1938 संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर 8 घंटे कार्य दिवस कानून 1938 में फेयर लेबर स्टैंडर्ड एक्ट के तहत बनाया गया। भारतवर्ष में सबसे पहले लाल झंडा मद्रास अब “चेन्नई” “तमिलनाडु” में 01 मई 1923 को मद्रास की “लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान” के ऐतिहासिक आयोजन का नेतृत्व क्रांतिकारी नेता सिंगरावेलू चेट्टियार ने किया। यह पहला अवसर था जब भारत में लाल झंडे का उपयोग किया गया। भारत में 8 घंटे के कार्य दिवस की शुरुआत सर्वप्रथम टाटा स्टील द्वारा की गई। 1942 में डॉ बी आर अंबेडकर ने श्रम मंत्री के रूप में कानूनी मान्यता दिलाई, यह नियम “अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन” के मानकों के आधार पर “8 घंटे काम” “8 घंटे आराम” और “8 घंटे मनोरंजन” के सिद्धांत तथा “अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन” के मानकों के आधार पर बनाया गया।

 

कार्यक्रम में भारी संख्या में कर्मचारी एवं ठेका श्रमिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम स्थल से आमजनों एवं निर्माणी के समस्त कर्मचारियों को वेज बिरयानी एवं कोल्ड ड्रिंक वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन मजदूर संघ महामंत्री नरेंद्र पटेल ने किया। आभार देवेंद्र पाढ़ी ने और समापन की घोषणा राजेश दुबे जी ने की।

Rohit Sen

15 वर्षों से प्रिंट एवं डिजीटल मीडिया में कार्य का अनुभव वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में जिला प्रतिनिधि