मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले से एक बेहद अनोखी और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है। जोबट तहसील के ग्राम बलेड़ी में एक बुजुर्ग की अंतिम विदाई का ऐसा नजारा दिखा, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। आमतौर पर अंतिम यात्रा में हर आँख नम होती है और मातम पसरा होता है, लेकिन यहाँ गम के माहौल के बजाय ढोल-नगाड़ों की गूंज और डीजे की धुन पर लोग नाचते-गाते नजर आए।
क्या थी बुजुर्ग की आखिरी इच्छा?
जानकारी के मुताबिक, ग्राम बलेड़ी के रहने वाले लिमसिंह बघेल गांव के सबसे बुजुर्ग नागरिकों में से एक थे। जीवित रहते हुए उन्होंने अपने परिवार और गांववालों के सामने एक अजीब लेकिन बेहद खास इच्छा जताई थी। लिमसिंह बघेल चाहते थे कि जब उनकी सांसें थम जाएं और वे इस दुनिया से जाएं, तो उनके परिजन या गांववाले रोएं नहीं, बल्कि जश्न मनाते हुए उन्हें नाचते-गाते हुए अंतिम विदाई दें।
गांववालों ने एकजुट होकर पूरी की ख्वाहिश
ग्राम सरपंच रमेश डावर ने बताया कि बुजुर्ग लिमसिंह बघेल के जाने का गम तो पूरे गांव को था, लेकिन उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करना गांववालों ने अपना कर्तव्य समझा। गुरुवार, 5 नवंबर को जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो मातम की जगह डीजे और ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार इस अनूठी अंतिम यात्रा में शामिल हुए और झूमते हुए श्मशान घाट तक पहुँचे।
सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना वीडियो
इस अनोखी अंतिम यात्रा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि कैसे एक बुजुर्ग ने अपनी मौत को भी एक उत्सव की तरह लेने का संदेश दिया और पूरे गांव ने मिलकर उनकी इस इच्छा को सम्मान के साथ पूरा किया। यह नजारा साबित करता है कि अपनों की खुशी और उनकी आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए लोग किस हद तक जा सकते हैं।

