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Odisha: छोटे से गांव ने पेश की मिसाल, दो साल में किसी को नहीं होने दिया कोरोना

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ओडिशा के एक गांव के लोगों ने केवल सरकारी निर्देशों का पालन कर दो सालों से कोरोना को अपने गांव से दूर रखा है।
आज पूरा देश कोरोना से जूझ रहा है और अब इसनें गांवों में पांव पसार लिये हैं। गांवों में इसे लेकर जागरुकता की इतनी कमी है कि लोग ना तो जांच कराना चाहते हैं और ना ही ढंग से इलाज कराना। कई गांवों मेंं लोग स्वास्थ्यकर्मियों को देखकर भाग खड़े होते हैं। ऐसे में ओडिशा के एक छोटे से गांव ने सबके सामने मिसाल पेश की है। इस गांव में 2020 में कोरोना संक्रमण की शुरुआत से आज तक कोई भी कोरोना से संक्रमित नहीं हुआ है।

ओडिशा के गंजम (Ganjam) जिले में दानापुर पंचायत का एक गांव है करंजारा। इस गांव में करीब 261 घर हैं, जिनमें करीब 1,234 लोग रहते हैं। जब से देश में कोरोना वायरस ने दस्तक दी है, तब से आज तक गांव में एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं मिला है। ऐसा नहीं है कि इनकी टेस्ट नहीं हुई। इसी साल जनवरी महीने में प्रशासन ने 32 लोगों को सैंपल टेस्ट किए थे, लेकिन सबकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। गंजम जिले के कलेक्टर विजय कुलंगे ने हाल में जब गांव का दौरा किया, और ग्रामीणों से बात की, तब उन्हें इसकी वजह समझ में आई।

बचाव के लिए क्या उपाय करते हैं गांव के लोग?

कलेक्टर ने बताया कि ग्रामीण कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल (safety protocol) के बारे में बहुत अधिक जानते हैं।
गांव में महिलाओं और बच्चों समेत सभी हमेशा मास्क पहनते हैं।
लोग बहुत कम घर से बाहर निकलते हैं। जब बेहद जरूरी काम हो, तभी बाहर निकलते हैं।
जब भी घर से बाहर निकलते हैं, तो सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करते हैं।

करंजारा ग्राम समुदाय के अध्यक्ष के मुताबिक महामारी की शुरुआत से ही ग्रामीणों के बीच मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिग जैसे तमाम नियमों का पालन करने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाती रही।
साल 2020 के कोरोना वायरस महामारी के बाद से ही ग्रामीणों ने कोई फंक्शन, त्यौहार या सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया है।
गांव के युवा नियमित रूप से स्वच्छता अभियान चलाते रहते हैं।

मुंबई में काम करनेवाले गांव के कुछ युवा जब वापस आये तो उन्हें गांव में आने से पहले सरकारी हेल्थकेयर सेंटर में 14 दिन तक क्वारंटीन में रखा गया।
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हल्के लक्षण वाले और हाई रिस्क वाले लोगों का हेल्थ चेकअप नियमित रूप से डोर-टू-डोर सर्वे करते रहते हैं। इन्होंने भी जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
अब तो आप समझ गये होंगे कि अगर सावधान रहा जाए और कोरोना संबंधी प्रोटोकॉल का ईमानदारी से पालन किया जाए, तो इस बीमारी से बचना कोई मुश्किल काम नहीं।

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