ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग में ग्वालियर प्रदेश में नंबर-1: अकेले ग्वालियर संभाग के 25 मामले, नगर निगम ग्वालियर पर 24% का कब्ज़ा
यशभारत वेब डेस्क: नगरीय निकायों में घटिया निर्माण, काम अधूरा छोड़ने और फर्जीवाड़ा करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के मामले में ग्वालियर मध्य प्रदेश में पहले स्थान पर आ गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट के आंकड़ों ने इस मामले में ग्वालियर की स्थिति को उजागर किया है।
प्रदेश की कुल कार्रवाई का 31.25% अकेला ग्वालियर संभाग
संचालनालय की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे मध्य प्रदेश में दर्ज कुल 80 ब्लैकलिस्टिंग और प्रतिबंध प्रकरणों में से 25 मामले अकेले ग्वालियर संभाग के हैं।प्रदेशभर में की गई कुल कार्रवाई का अकेला 31.25 प्रतिशत हिस्सा ग्वालियर संभाग का है संभाग के 25 मामलों में से 19 मामले अकेले नगर निगम ग्वालियर के हैं, जो कि पूरे प्रदेश के कुल प्रकरणों का लगभग 24 प्रतिशत बनता है। ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग में ग्वालियर प्रदेश में नंबर-1: अकेले ग्वालियर संभाग के 25 मामले, नगर निगम ग्वालियर पर 24% का कब्ज़ा
संभागवार आंकड़े: इंदौर दूसरे, तो रीवा-सागर तीसरे नंबर पर
नगरीय प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार संभागवार ब्लैकलिस्टिंग के आंकड़े इस प्रकार हैं:
- ग्वालियर संभाग: 25 प्रकरण (प्रथम स्थान) [नगर निगम ग्वालियर: 19]
- इंदौर संभाग: 12 प्रकरण (द्वितीय स्थान)
- रीवा संभाग: 10 प्रकरण
- सागर संभाग: 10 प्रकरण
- भोपाल संभाग: 08 प्रकरण
- जबलपुर संभाग: 06 प्रकरण
- उज्जैन संभाग: 05 प्रकरण
क्यों हो रही ठेकेदारों पर इतनी सख्त कार्रवाई?
रिपोर्ट के अनुसार, ठेकेदारों पर प्रतिबंध और ब्लैकलिस्टिंग की यह कार्रवाई कई गंभीर अनियमितताओं के कारण की गई है, टेंडर पास होने के बावजूद औपचारिक एग्रीमेंट न करना।कार्य शुरू न करना या बीच में ही काम छोड़कर गायब हो जाना।टेंडर प्रक्रिया में जाली व गलत कागजात प्रस्तुत करना।निर्माण कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न होना।
नगर निगम और संचालनालय की इस कड़ी कार्रवाई से लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

