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अम्मा के जरिए केरल में भाजपा और संघ परिवार की नई सामाजिक-राजनीतिक रणनीति

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अम्मा के जरिए केरल में भाजपा और संघ परिवार की नई सामाजिक-राजनीतिक रणनीति, केरल की राजनीति में एक नई रणनीतिक हलचल देखने को मिल रही है, जहां भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सांस्कृतिक ध्रुवीकरण के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। इस रणनीति के केंद्र में हैं प्रसिद्ध संत माता अमृतानंदमयी, जिन्हें ‘अम्मा’ के नाम से जाना जाता है।

अम्मा के जरिए केरल में भाजपा और संघ परिवार की नई सामाजिक-राजनीतिक रणनीति

हाल ही में अम्मा ने 1,000 से अधिक अनुयायियों के साथ अयोध्या का दौरा किया, जहां उन्होंने राम मंदिर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और द्रौपदी मुर्मू के साथ मंच साझा किया। इस यात्रा को केरल के तटस्थ हिंदू मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संकेत माना जा रहा है।

अम्मा का संबंध केरल के धीवर (मछुआरा) समुदाय से है, जो लंबे समय से वामपंथी राजनीति का आधार रहा है। ऐसे में भाजपा और संघ परिवार द्वारा अम्मा के प्रति सम्मान जताना इन समुदायों तक पहुंच बनाने और उन्हें व्यापक हिंदू पहचान से जोड़ने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

इसी कड़ी में आरएसएस द्वारा “हिंदू एकता सम्मेलन” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न जातियों को एक मंच पर लाना है। हाल ही में ऐसा ही एक आयोजन नेमम विधानसभा क्षेत्र में अम्मा के संस्थान से जुड़े स्कूल में हुआ, जिसमें राजीव चंद्रशेखर की उपस्थिति भी चर्चा में रही।

‘हगिंग सेंट’ के रूप में प्रसिद्ध अम्मा अब तक करोड़ों लोगों को आलिंगन दे चुकी हैं और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ है। जी-20 के दौरान उन्हें सिविल-20 का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्होंने वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर नीति-निर्माण में योगदान दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि आध्यात्मिकता, समाज सेवा और सांस्कृतिक जुड़ाव के इस मिश्रण के जरिए केरल में भाजपा एक नई राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिसका असर आने वाले समय में दिख सकता है।

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