नरेंद्र मोदी ने नई संसद में कहा कि जब भी इस संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी। यह सेंगोल हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा। भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी भी है। भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक व्यवस्था ही नहीं, एक संस्कार है, एक विचार है, एक परंपरा है।
उन्होंने कहा कि कोई भी एक्सपर्ट अगर पिछले नौ वर्षों का आकलन करे तो पाएगा कि यह नौ वर्ष गरीबों के कल्याण के लिए रहे हैं। मुझे पिछले नौ साल में गरीबों के लिए चार करोड़ घर बनने का संतोष है। हम जब इस भव्य इमारत को देखकर अपना सिर ऊंचा कर रहे हैं, तो हम नौ साल में बने 11 करोड़ शौचालय को देखकर गर्व कर रहे हैं। चार लाख किमी से ज्यादा सड़कों का निर्माण किया। हमने चार साल में अमृत सरोवरों का निर्माण किया। हमने 30000 से ज्यादा पंचायत भवन भी बनाए हैं। यानी पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक हमारी निष्ठा एक ही है। हमारी प्रेरणा एक रही है। देश का विकास, देश के लोगों का विकास।
पीएम मोदी ने पुरानी संसद में आने वाली परेशानियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि साथियों संसद के पुराने भवन में सभी के लिए अपने कार्यों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था, यह हम सभी जानते हैं। तकनीक, बैठने की जगह से जुड़ी चुनौतियां थीं। हमें यह भी देखना था कि आने वाले समय में सीटों की संख्या बढ़ेगी, सांसदों की संख्या बढ़ेगी तो वे कहां बैठेंगे। इसलिए यह समय की जरूरत थी कि संसद के नए भवन का निर्माण किया जाए।

