न तारीख लिखी, न अफसर का नाम” भोपाल नगर निगम के नोटिस पर बवाल, अवैध दुकानों पर एक्शन बना दिखावा?
भोपाल में अवैध दुकानों पर नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल- नोटिस से नगर निवेशक का नाम और तारीख ही गायब, दिखावे के आरोप
न तारीख लिखी, न अफसर का नाम” भोपाल नगर निगम के नोटिस पर बवाल, अवैध दुकानों पर एक्शन बना दिखावा?
भोपाल:मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश आवासीय इलाकों में अवैध रूप से संचालित हो रही व्यावसायिक दुकानों और संस्थानों के खिलाफ नगर निगम का एक्शन अब खुद विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। अरेरा कॉलोनी और रोहित नगर के 429 व्यापारियों को थमाए गए नोटिस की मोहलत 30 जुलाई को खत्म हो रही है।
शहर भर में निगम अब तक 800 से अधिक व्यापारियों को नोटिस थमा चुका है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी लापरवाही और ‘चालाकी’ सामने आई है।
न नाम, न तारीख… नोटिस की खामियों से उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, बैरागढ़ और अन्य क्षेत्रों में आवासीय अनुमति (Residential Permit) पर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे दुकानदारों को जो नोटिस बांटे गए हैं, उनमें गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं:
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अधिकारी का नाम गायब: नोटिस पर नगर निवेशक के हस्ताक्षर (Signatures) तो हैं, लेकिन उनका नाम गायब है।
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तारीख का उल्लेख नहीं: नोटिस किस दिन जारी किया गया, उस पर तारीख तक दर्ज नहीं की गई है।
रहवासियों का आरोप: ‘कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा’
इन खामियों भरे नोटिसों को देखकर अरेरा कॉलोनी और आसपास के इलाकों के रहवासियों तथा व्यापारियों ने नगर निगम की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर रहा है और कार्रवाई का महज दिखावा किया जा रहा है।
तारीख और नाम न होने की वजह से ये नोटिस कानूनी रूप से कमजोर साबित हो सकते हैं, जिससे अवैध रूप से चल रही दुकानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।








