18 जुलाई से 10 अगस्त तक मॉनसून सत्र, लोकसभा की सीटें 850 करने वाले बिल पर दोबारा दांव खेलेगी NDA?
18 जुलाई से 10 अगस्त तक मॉनसून सत्र, लोकसभा की सीटें 850 करने वाले बिल पर दोबारा दांव खेलेगी NDA?
18 जुलाई से 10 अगस्त तक मॉनसून सत्र, लोकसभा की सीटें 850 करने वाले बिल पर दोबारा दांव खेलेगी NDA?
नई दिल्ली: देश की सियासी हलचलों के बीच संसद के आगामी मॉनसून सत्र (Monsoon Session of Parliament) की तारीखों का ऐलान हो गया है। इस साल संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 10 अगस्त तक चलेगा। लगभग तीन सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन सरकार इस सत्र में एक बार फिर बड़ा दांव चलते हुए ‘संविधान संशोधन विधेयक’ (Constitution Amendment Bill) को सदन के पटल पर रख सकती है।
‘परिसीमन’ और लोक सभा सीटों को लेकर छिड़ेगा घमासान
सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस सत्र में सरकार 131वें संविधान संशोधन विधेयक (The Constitution 131st Amendment Bill) को नए सिरे से या नए रणनीतिक समीकरणों के साथ दोबारा पेश करने की योजना बना रही है।
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क्या है इस बिल में: इस विधेयक के जरिए देश में लोकसभा सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है, जिससे 2011 की जनगणना के आधार पर देश में सीटों का नए सिरे से परिसीमन (Delimitation) किया जा सके और महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ तुरंत मिल सके।
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पिछली बार क्या हुआ था: बजट सत्र के दौरान इस बिल पर सदन में 21 घंटे से ज्यादा लंबी बहस हुई थी, लेकिन दो-तिहाई (2/3) बहुमत न मिल पाने के कारण यह बिल गिर गया था (पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े थे)।
बदलते समीकरण: क्या इस बार बाजी मारेगी NDA?
बजट सत्र में मिली नाकामी के बाद अब मॉनसून सत्र में एनडीए की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है। हाल ही में विपक्षी खेमे, खासकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों के रुख में आए बदलाव और दक्षिण भारत के प्रमुख दल द्रमुक (DMK) के साथ परदे के पीछे चल रही बातचीत की खबरों ने नए सियासी समीकरण पैदा कर दिए हैं।
चूंकि संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है, ऐसे में एनडीए गठबंधन विपक्षी दलों में सेंध लगाकर या कुछ क्षेत्रीय दलों को वोटिंग के दौरान अनुपस्थित (Abstain) रहने के लिए मनाकर इस बेहद महत्वाकांक्षी बिल को पास कराने की जुगत में है।








