MP का अब तक का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट: ₹36,483 करोड़ से बिछेगा 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर का जाल; छत्तीसगढ़ से सीधे गुजरात बॉर्डर को कनेक्ट करेंगे 6 नए एक्सप्रेस-वे ग्रिड – yashbharat.com
MP का अब तक का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट: ₹36,483 करोड़ से बिछेगा 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर का जाल; छत्तीसगढ़ से सीधे गुजरात बॉर्डर को कनेक्ट करेंगे 6 नए एक्सप्रेस-वे ग्रिड - yashbharat.com
MP का अब तक का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट: ₹36,483 करोड़ से बिछेगा 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर का जाल; छत्तीसगढ़ से सीधे गुजरात बॉर्डर को कनेक्ट करेंगे 6 नए एक्सप्रेस-वे ग्रिड – yashbharat.com
भोपाल: मध्य प्रदेश की सड़कों पर रफ्तार, उद्योग और विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू होने जा रहा है। सूबे के सभी 55 जिलों की भौगोलिक तस्वीर बदलने और शहरों के बीच की दूरी को बेहद कम करने के लिए मोहन सरकार एक विशाल एक्सप्रेस-वे ग्रिड (Express-way Grid) पर काम कर रही है। इस महापरियोजना के तहत प्रदेश में 6 नए मेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 3,300 किलोमीटर होगी।
इस एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के निर्माण के लिए 36,483 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है, और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे साल 2028 तक पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
विंध्य से मालवा और छत्तीसगढ़ से गुजरात तक जुड़ेगा ‘कनेक्टिविटी का महाजाल’
यह केवल डामर और कंक्रीट की सड़कें नहीं हैं, बल्कि यह परियोजना मध्य प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की आर्थिक रीढ़ (Economic Backbone) को मजबूत करने का काम करेगी:
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चारों अंचल होंगे कनेक्ट: इस ग्रिड के माध्यम से विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल को सीधे जोड़ा जाएगा।
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अंतर-राज्यीय व्यापार को रफ्तार: यह कॉरिडोर जाल बालाघाट से बैतूल तक के आदिवासी अंचल को मुख्यधारा से जोड़ेगा। साथ ही छत्तीसगढ़ के बिलासपुर व रायपुर से होते हुए मध्य प्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात सीमा तक जाएगा, जिससे मध्य भारत का व्यापार सीधे पश्चिमी बंदरगाहों और औद्योगिक हब से कनेक्ट हो जाएगा। MP का अब तक का सबसे बड़ा सड़क प्रोजेक्ट: ₹36,483 करोड़ से बिछेगा 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर का जाल; छत्तीसगढ़ से सीधे गुजरात बॉर्डर को कनेक्ट करेंगे 6 नए एक्सप्रेस-वे ग्रिड – yashbharat.com
औद्योगिक क्रांति का आधार बनेंगे ये 6 आर्थिक गलियारे
3,300 किलोमीटर लंबे इन गलियारों के दोनों तरफ सरकार विशेष औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स पार्क और व्यापारिक जोन (Industrial Zones) विकसित करेगी।
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रोजगार के लाखों अवसर: इन कॉरिडोर्स के बनने से प्रदेश में बड़े उद्योगों का आना तय माना जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की बाढ़ आएगी।
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समय और ईंधन की बचत: एक्सप्रेस-वे ग्रिड बनने से भारी मालवाहक वाहनों और आम जनता का सफर न सिर्फ सुरक्षित होगा, बल्कि समय और करोड़ों रुपये के ईंधन की बचत होगी।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्ययोजना (DPR) पर काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। साल 2028 में जब यह प्रोजेक्ट जमीन पर उतरेगा, तब मध्य प्रदेश देश के सबसे बेहतरीन सड़क कनेक्टिविटी वाले राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा।








