शासन के इस असमंजस का सीधा असर आगामी 16 जून से खुलने जा रहे स्कूलों पर पड़ेगा, जिससे प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई की शुरुआत बिना तय गणवेश के होने के आसार बन गए हैं।
खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
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असमंजस बरकरार: सिली-सिलाई ड्रेस या खाते में पैसा? शासन स्तर पर नीति तय न होने से थमी प्रक्रिया।
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रंग-बिरंगे कपड़ों में दिखेंगे स्कूल: 16 जून से स्कूल खुलने पर निर्धारित यूनिफॉर्म के बजाय अलग-अलग कपड़ों में आ सकते हैं बच्चे।
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सबसे ज्यादा परेशान होंगे नए बच्चे: नर्सरी और पहली कक्षा (Class 1) में नया दाखिला लेने वाले नौनिहालों के पास पुरानी ड्रेस भी नहीं।
नर्सरी और पहली कक्षा के बच्चों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
स्कूलों में नया सत्र शुरू होने पर सबसे अधिक फजीहत उन बच्चों की होगी जो इस साल पहली बार नर्सरी या कक्षा पहली में प्रवेश ले रहे हैं। पुराने विद्यार्थियों के पास तो पिछले वर्षों की पुरानी या छोटी हो चुकी गणवेश का विकल्प मौजूद है, लेकिन नए प्रवेश लेने वाले बच्चों के पास पिछले वर्षों की कोई गणवेश उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शुरुआती महीनों में प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के भीतर अनुशासन और एकरूपता प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
समय पर राशि या ड्रेस न मिलने से पेरेंट्स भी परेशान
आमतौर पर गणवेश की तैयारी सत्र शुरू होने के एक-दो महीने पहले ही कर ली जाती है। यदि विभाग अब खातों में राशि भेजने का फैसला करता भी है, तो टेंडर प्रक्रिया, बजट जारी होने और अभिभावकों द्वारा बाजार से कपड़ा खरीदकर सिलवाने में कम से कम दो से तीन महीने का समय और लग जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगस्त या सितंबर से पहले बच्चों के बदन पर नई यूनिफॉर्म दिखना मुश्किल है।
शिक्षकों और प्राचार्यों की चिंता: “16 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी हम प्रवेश उत्सव की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बच्चों की यूनिफॉर्म को लेकर हमारे पास विभाग से कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं आई है। ड्रेस कोड के बिना सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति सामान्य कपड़ों में ही करानी होगी।”