MP पदोन्नति नियम 2025: विधानसभा समिति शुरू करेगी परीक्षण, 9 साल बाद संवैधानिक समीक्षा

MP पदोन्नति नियम 2025: विधानसभा समिति शुरू करेगी परीक्षण, 9 साल बाद संवैधानिक समीक्षा

MP पदोन्नति नियम 2025: विधानसभा समिति शुरू करेगी परीक्षण, 9 साल बाद संवैधानिक समीक्षा। भले ही सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू कर दिए हों लेकिन अभी इन्हें विधानसभा देखेगी। 28 जुलाई से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र में सामान्य प्रशासन विभाग पदोन्नति नियम की अधिसूचना पटल पर रखेगी। इसे प्रत्यायुक्त विधान समिति को सौंपा जाएगा, जो यह परीक्षण करेगी कि यह विधि अनुरूप है या नहीं।

संविधान के किसी प्रविधान का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। यदि समिति को लगता कि यदि किसी नियम का उल्लंघन हो रहा है या किसी प्रविधान में स्पष्टता नहीं है तो वह संशोधन की अनुशंसा करेगी।

नौ साल बाद लागू हुए नियम के क्रियान्वयन पर फिलहाल है रोक

प्रदेश सरकार ने 2002 के पदोन्नति नियम को हाई कोर्ट जबलपुर द्वारा वर्ष 2016 में निरस्त करने के नौ साल बाद नए नियम बनाकर लागू किए हैं। सामान्य वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने अनारक्षित वर्ग के पदों पर एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों को भी पदोन्नति का अवसर देने, पहले आरक्षित वर्ग के पदों पर पदोन्नति करने, सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस न लेने और वर्ष 2002 के नियम से पदोन्नत कर्मचारियों को पदावनत किए बिना पदोन्नति के लिए पात्र बनाने पर आपत्ति करते हुए नियम को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

इस पर कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जब तक इस मामले में हाई कोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं देता, तब तक सरकार नए नियमों के आधार पर कोई भी पदोन्नति या संबंधित कार्रवाई न करे। अगली सुनवाई 15 जुलाई को है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न याचिकाओं पर जो निर्णय दिए और नए नियम के आधार पर जवाब तैयार किया है।

सभी अधिसूचनाएं पटल पर रखना अनिवार्य

नियमानुसार दो सत्र के बीच में विभागों द्वारा जो अधिसूचनाएं राजपत्र में प्रकाशित की जाती हैं, उन्हें सदन के पटल पर रखना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी सदस्यों को सरकार द्वारा नियम, विनियम और उप नियम में किए गए संशोधन या नई व्यवस्था के बारे में जानकारी हो जाए। विधानसभा सचिवालय इन्हें सत्र समाप्त होने के बाद प्रत्यायुक्त विधान समिति को भेजता है, जहां इनका परीक्षण किया जाता है।

समिति का यह है काम

समिति यह सुनिश्चित करती है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम, विनियम और उप-नियम संविधान के अनुरूप हैं या नहीं। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह का कहना है कि प्रत्यायुक्त विधान समिति को सत्र समाप्त होने के बाद समस्त अधिसूचनाएं मिल जाती हैं।

वह इनका परीक्षण करती है और अपनी अनुशंसा देती है, जिस पर विभागों से जानकारी मांगी जाती है। यदि यह पाया जाता है कि कोई प्रविधान विधि के अनुरूप नहीं है तो वरिष्ठ अधिकारी को साक्ष्य के लिए बुलाया जाता है और वे अपने तर्क रखते हैं। यदि आवश्यकता होती है तो फिर संशोधन भी किया जाता है।

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