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MP पुलिस का ‘ऑपरेशन हमदर्द’: रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 बेसहारा लोगों का बना डिजिटल रिकॉर्ड; ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

MP पुलिस का 'ऑपरेशन हमदर्द': रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 बेसहारा लोगों का बना डिजिटल रिकॉर्ड; ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

MP पुलिस का ‘ऑपरेशन हमदर्द’: रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 बेसहारा लोगों का बना डिजिटल रिकॉर्ड; ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश के रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, भिक्षुक, निराश्रित बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों को सुरक्षा, सहारा और नई जिंदगी देने के लिए मध्य प्रदेश शासकीय रेलवे पुलिस (GRP) द्वारा चलाया जा रहा ‘ऑपरेशन हमदर्द’ (Operation Hamdard) बेहद प्रभावी साबित हो रहा है।

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इस विशेष अभियान के शुरू होने के महज दो दिनों के भीतर ही जीआरपी ने प्रदेश के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों से 235 लोगों की पहचान कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के पहले दिन 1 जुलाई को 150 लोगों और दूसरे दिन 2 जुलाई की शाम 6:00 बजे तक 85 लोगों का विस्तृत विवरण डिजिटल डेटाबेस में दर्ज किया गया।

देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश, अब साल में दो बार चलेगा अभियान

इस तरह का व्यापक और आधुनिक डिजिटल सर्वे अभियान शुरू करने वाला मध्यप्रदेश पूरे देश का पहला राज्य बन गया है। रेलवे स्टेशनों पर बड़ी संख्या में ‘फ्लोटिंग पापुलेशन’ (अस्थाई आबादी) रहती है, जिनकी कोई पहचान नहीं होती। MP पुलिस का ‘ऑपरेशन हमदर्द’: रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले 235 बेसहारा लोगों का बना डिजिटल रिकॉर्ड; ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

एडीजी (रेलवे) राजाबाबू सिंह का बयान: “इस डिजिटल रिकॉर्ड से स्टेशन और उसके आसपास सक्रिय अपराधियों व असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखना बेहद आसान हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, इस डेटा की मदद से बेसहारा बुजुर्गों, अनाथ बच्चों, लाचार महिलाओं और गरीब मजदूरों को सरकारी पुनर्वास योजनाओं का सीधा लाभ भी मिल सकेगा।”

रेलवे पुलिस के अनुसार, अपराध नियंत्रण और सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए यह विशेष डिजिटल सर्वे अभियान अब हर साल जुलाई और जनवरी के महीने में नियमित रूप से चलाया जाएगा।

40% लोगों को मिला ‘रैन बसेरों’ का आसरा, शुरू हुआ पुनर्वास

अभियान के दौरान जीआरपी की विशेष टीमों ने स्टेशन परिसरों और प्लेटफॉर्मों पर रात गुजारने वाले भिक्षुकों, निराश्रितों और अकेले घूम रहे नाबालिग बच्चों से संवेदनशीलता के साथ संपर्क किया और उनकी पूरी पारिवारिक व व्यक्तिगत जानकारी जुटाई।

कागजी कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इनमें से लगभग 40 प्रतिशत लोगों को तुरंत सुरक्षित रैन बसेरों (Night Shelters) में शिफ्ट कराया। इसके अलावा, बाकी बचे जरूरतमंद और लाचार लोगों को संबंधित सामाजिक संस्थाओं, एनजीओ (NGOs) और महिला-बाल विकास जैसे सरकारी विभागों के माध्यम से आवश्यक मदद और संरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस अभियान से न सिर्फ स्टेशनों पर होने वाली चोरी, पॉकेटमारी और अन्य वारदातों पर अंकुश लगेगा, बल्कि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लौटने का मौका भी मिलेगा।

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