MP Mandi Tax Hike: मध्य प्रदेश में कृषि उपज पर बढ़ा मंडी शुल्क- व्यापारियों को अब देना होगा 1.70% टैक्स; व्यापार चौपट होने के डर से भड़के कारोबारी
MP Mandi Tax Hike: मध्य प्रदेश में कृषि उपज पर बढ़ा मंडी शुल्क- व्यापारियों को अब देना होगा 1.70% टैक्स; व्यापार चौपट होने के डर से भड़के कारोबारी

MP Mandi Tax Hike: मध्य प्रदेश में कृषि उपज पर बढ़ा मंडी शुल्क- व्यापारियों को अब देना होगा 1.70% टैक्स; व्यापार चौपट होने के डर से भड़के कारोबारी
बिजनेस डेस्क: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बीते सप्ताह कृषि उपज पर 0.50 फीसद (0.50%) मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद अब इसे जमीनी स्तर पर लागू कर दिया गया है। प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों में मंगलवार से नया बढ़ा हुआ मंडी शुल्क 1.50 फीसद (1.50%) प्रभावी हो गया है।
इस नए बदलाव के बाद, अब 0.20 फीसद (0.20%) निराश्रित शुल्क को मिलाकर व्यापारियों को कृषि उपज की कुल खरीदी पर 1.70 फीसद (1.70%) मंडी शुल्क का भुगतान करना होगा। सरकार के इस अचानक लिए गए फैसले से प्रदेश भर के अनाज और कृषि व्यापारियों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। MP Mandi Tax Hike: मध्य प्रदेश में कृषि उपज पर बढ़ा मंडी शुल्क- व्यापारियों को अब देना होगा 1.70% टैक्स; व्यापार चौपट होने के डर से भड़के कारोबारी
मंडी शुल्क का नया गणित: एक नज़र में
अब तक मंडियों में टैक्स का ढांचा काफी कम था, लेकिन नए नियमों के बाद व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ेगा:
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पहले का कुल शुल्क: अब तक प्रदेश की मंडियों में व्यापारियों को कुल 1.20 फीसद शुल्क देना पड़ता था।
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अब का नया कुल शुल्क: मंगलवार से 1.50% मंडी शुल्क और 0.20% निराश्रित शुल्क को मिलाकर यह बढ़कर कुल 1.70 फीसद हो गया है।
“चौपट हो जाएगा धंधा, अफसरशाही को मिलेगा बढ़ावा” – व्यापारियों की चेतावनी
सरकार के इस फैसले के विरोध में प्रदेश के विभिन्न व्यापारिक संगठनों और महासंघों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। व्यापारियों का कहना है कि:
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प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा MP: देश के अन्य प्रमुख कृषि उपज उत्पादक राज्यों (जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र) में मंडी शुल्क मध्य प्रदेश की तुलना में काफी कम है। ऐसे में दूसरे राज्यों के मुकाबले मध्य प्रदेश के व्यापारियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा (Competition) में व्यापार करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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बेनामी व्यापार का खतरा: कारोबारियों ने आशंका जताई है कि टैक्स बढ़ने से मंडियों में वैध व्यापार प्रभावित होगा। इससे बाजार में अफसरशाही (Bureaucracy) का दखल बढ़ेगा और टैक्स चोरी या ‘बेनामी व्यापार’ को अनैतिक रूप से बढ़ावा मिलेगा, जिससे अंततः सरकार के राजस्व को ही नुकसान हो सकता है।








