MP कैबिनेट के बड़े फैसले: 4 नए जिलों में खुलेंगे DEO दफ्तर, 392 अफसरों पर गिरी गाज और कैंपा फंड के ₹2,050 करोड़ मंजूर
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। बैठक में सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया गया।
कैबिनेट बैठक के 5 मुख्य फैसले:
-
4 नवगठित जिलों में DEO कार्यालयों की सौगात: राज्य सरकार ने प्रदेश के नए जिलों—निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय खोलने और उनके लिए जरूरी पदों की स्वीकृति दी है। इससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा का प्रशासनिक कामकाज आसान होगा।
-
निकायों में गड़बड़ी पर 392 अधिकारियों पर कार्रवाई: नगरीय निकायों में सामान की खरीदारी में अनियमितताओं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए 201 मामलों का खुलासा हुआ है। इसके तहत 392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर गाज गिरी है (जिनमें 7 की बर्खास्तगी, वेतन वृद्धि रोकना और डिमोशन शामिल हैं) तथा 80 से अधिक सप्लायर्स/ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की गई है। MP कैबिनेट के बड़े फैसले: 4 नए जिलों में खुलेंगे DEO दफ्तर, 392 अफसरों पर गिरी गाज और कैंपा फंड के ₹2,050 करोड़ मंजूर
-
कैंपा (CAMPA) फंड को ₹2,050 करोड़: पर्यावरण संरक्षण, नए पेड़ लगाने और वनीकरण (Afforestation) को गति देने के लिए कैंपा फंड के तहत ₹2,050 करोड़ की विशाल कार्ययोजना स्वीकृत की गई।
-
जांच एजेंसियों और विकास योजनाओं को बड़ा बजट:
आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने के लिए EOW को ₹345 करोड़ की राशि दी गई।नर्मदा घाटी विकास विभाग की चार चल रही परियोजनाओं (छिंदवाड़ा, मुरैना, सिवनी और सागर) के लिए ₹3,378 करोड़ मंजूर किए गए।सामाजिक न्याय विभाग की 7 कल्याणकारी योजनाओं के लिए ₹351 करोड़ स्वीकृत हुए।
-
21-22 दिसंबर को मंत्रियों का ‘चिंतन शिविर’: सरकार के तीन साल के कामकाज की समीक्षा और आगामी वर्ष की कार्ययोजना तय करने के लिए 21 और 22 दिसंबर को मंत्रियों का विशेष चिंतन शिविर आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

