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MP Cabinet Decision: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूर होगी डॉक्टरों की कमी, अब 1 साल तक विभाग खुद करेगा सीधी भर्ती

MP Cabinet Decision: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूर होगी डॉक्टरों की कमी, अब 1 साल तक विभाग खुद करेगा सीधी भर्ती

MP Cabinet Decision: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूर होगी डॉक्टरों की कमी, अब 1 साल तक विभाग खुद करेगा सीधी भर्ती

भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया गया है।

अब प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialist Doctors) की कमी को तत्काल दूर करने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आगामी एक वर्ष तक अपने स्तर पर सीधे डॉक्टरों की भर्ती कर सकेगा।

MPPSC के बिना होगी सीधी भर्ती, नहीं करना होगा लंबा इंतजार

आमतौर पर सरकारी डॉक्टरों की भर्ती मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से होती है, जिसमें एक लंबी प्रक्रिया और समय लगता है। कैबिनेट के नए फैसले के अनुसार, अब विभाग को भर्ती के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग आगामी एक साल तक सीधे वॉक-इन-इंटरव्यू या अपनी तय प्रक्रिया के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति कर सकेगा, जिससे अस्पतालों को तुरंत डॉक्टर मिल सकेंगे।

नए डॉक्टरों के लिए ‘3 साल का कड़ा नियम’ अनिवार्य

सरकार ने डॉक्टरों की भर्ती को मंजूरी देने के साथ ही एक बेहद महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को इसका पूरा लाभ मिल सके:

  • 3 साल की अनिवार्य सेवा: इस विशेष भर्ती के तहत नियुक्त होने वाले सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों को कम से कम तीन वर्ष (3 साल) तक संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ही अपनी सेवाएं देना अनिवार्य होगा।MP Cabinet Decision: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूर होगी डॉक्टरों की कमी, अब 1 साल तक विभाग खुद करेगा सीधी भर्ती

  • तबादले पर रोक: इन तीन सालों के दौरान डॉक्टरों का ट्रांसफर (स्थानांतरण) नहीं किया जा सकेगा। तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद ही उनका ट्रांसफर सामान्य डॉक्टरों की तरह अन्य जगहों पर हो सकेगा।

पायलट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया: गौरतलब है कि इससे पहले हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने प्रदेश के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के बेहतर संचालन और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया था। अब इस फैसले से स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले जिन पर लगी मुहर:

डॉक्टरों की भर्ती के अलावा बुधवार को हुई इस कैबिनेट बैठक में कई और बड़े नीतिगत फैसले लिए गए हैं:

  1. MSP के बचे अनाज की नीलामी: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे गए गेहूं, धान, ज्वार और बाजरा में से जो अनाज केंद्र सरकार के ‘केंद्रीय पूल’ में शामिल नहीं होगा, उसकी राज्य सरकार अब खुले बाजार में नीलामी करेगी। इससे भंडारण और रखरखाव का खर्च बचेगा।

  2. जिलों में बनेंगे ‘IT हब’: स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में छोटे-छोटे आईटी क्लस्टर (IT Clusters) विकसित किए जाएंगे।MP Cabinet Decision: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दूर होगी डॉक्टरों की कमी, अब 1 साल तक विभाग खुद करेगा सीधी भर्ती

  3. सरदार सरोवर विवाद सुलझा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर दशकों पुराना सरदार सरोवर बांध परियोजना विवाद सुलझ गया है। मध्य प्रदेश सरकार वन-टाइम सेटलमेंट के तहत गुजरात को ₹217 करोड़ का भुगतान करेगी।

  4. 10 साल बाद पदोन्नति: प्रदेश में 1 जुलाई 2026 से कर्मचारियों की रुकी हुई पदोन्नति (Promotions) दोबारा शुरू होने पर कैबिनेट मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया।

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