भोपाल। कोरोनाकाल में अगस्त से प्रदेश के स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। फरवरी में मप्र बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। इस साल छह माह में करीब 140 दिन कक्षाएं लगेंगी, जबकि सामान्य शिक्षा सत्र में करीब 230 दिन स्कूल संचालित होते हैं। कम कक्षाएं लगने को लेकर माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) ने मप्र बोर्ड परीक्षा के प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रम में 20 से 30 फीसद तक कटौती करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सत्र 2021-22 में परीक्षा का पैटर्न भी बदला गया है। अब सभी विषयों में 40 फीसद वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। माशिमं ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
एमपी बोर्ड द्वारा प्रत्येक विषय में कटौती किए गए अध्याय के साथ विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। हालांकि, माशिमं ने नौवीं से बारहवीं तक के पाठ्यक्रम में कटौती कर वेबसाइट पर अपलोड किया है। माशिम ने पाठ्यचर्या समिति की बैठक कर सभी विषयों के अध्यायों में अलग-अलग कटौती की है। मालूम हो कि हाल ही में बोर्ड ने एक निर्देश जारी कर 12 फरवरी से 30 मार्च तक दसवीं व बारहवीं की परीक्षा कराए जाने का निर्णय लिया है। माशिमं के अधिकारियों का कहना है कि दो साल से मार्च के अंत में कोरोना संक्रमण अधिक होने के कारण परीक्षाएं निरस्त कर दी गईं। इस आशंका को देखते हुए भी इस बार जल्दी परीक्षा ली जा रही है।
इस तरह का होगा प्रश्नपत्र
प्रत्येक विषय में 40 फीसद वस्तुनिष्ठ प्रश्न, 40 फीसद पाठ्यपुस्तक पर आधारित और 20 फीसद विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें दो अंक के अति लघुउत्तरीय, तीन अंक के लघु उत्तरीय, चार अंक के दीर्घ उत्तरीय और पांच अंक के अति दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होंगे।
दसवीं अंग्रेजी में दस पाठ कम किए गए
दसवीं के अंग्रेजी में दस अध्याय कम किए गए हैं। इनमें मैडम राइड्स द बस, द प्रपोजल, मिडनाइट विजिटर, द मेकिंग आफ अ साइंटिस्ट, द बुक दैट सेव्ड द अर्थ, हाउ टू टेल वाइल्ड एनिमल्स। वहीं संस्कृत में तीन अध्याय हटाए गए हैं। दसवीं के हिंदी विषय में पायनि नुपूर, डार द्रुम पलना, फटिक सिलान, यह दंतुरित मुस्कान, संगतकार, लखनवी अंदाज, नौबतखाने में इबादत, साना-साना हाथ जोड़ी, ऐही ठैयां झुलनी हेरानी हो रामा विषयवस्तु कम किए गए हैं।
दसवीं गणित में 10 अध्याय कम किए गए
दसवीं गणित में अपरिमेय संख्याओं का पुनर्भ्रमण, परिमेय संख्याओं और उनके दशमलव प्रसारों का पुर्नभ्रमण, बहुपदों के लिए विभाजन ऐल्गोरिथ्म, रैखिक समीकरण युग्म क ग्राफिक विधि से हल, दो चरों के रैखिक समीकरणों के युग्म में बदले जा सकने वाले समीकरण, त्रिभुजों की समरूपता के लिए कसौटियां, समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफल, त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग आदि विषयवस्तु को कम किया गया है। वहीं विज्ञान में छह अध्याय कम किए गए हैं। इनमें धातु, अधातु, अनुवांशिकता व जैव विकास, वैद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन आदि शामिल हैं।
दसवीं सामाजिक विज्ञान में भी कम किए गए पाठ
सामाजिक विज्ञान के इतिहास में क्रांतियों का युग, युरोप में राष्ट्रवाद का उदय, भूगोल से वर्ष जल संग्रहण, प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, राजनीति से खलील की उलझन, भारत का विकेंद्रीकरण, ब्राजील का एक प्रयोग, राजनीति को सुधारना, लोकतंत्र की पुर्नपरिभाषा आदि पाठ को हटाया गया है।
बारहवीं हिंदी में सात अध्याय कम किए
पतंग, सहर्ष स्वाकारा, बादल राग, काले मेघा पानी दे, चार्ली चैप्लिन यानि हम सब, नमक, डायरी के पन्नो पाठ को कम किया गया है। वहीं अंग्रेजी में पोएट्स एंड पैनकेक्स, द थर्ड लेवल, मेमोरिज आफ चाइल्डवुड, आंट जेनिफर्स, टाइगर्स को हटाया गया है। संस्कृत से दो पाठ हटाए गए।
बारहवीं विज्ञान में रसायनशास्त्र से अधिक पाठ कम किए हैं
विज्ञान के भौतिकी में चुंबकत्व एवं द्रव्य, परमाणु व नाभिक और रसायन में विद्युतीय गुण, चुंबकीय गुण, बैटरियां, ईंधन सेल, इमल्शन, उत्प्रेरण, आक्सीकरण, नाइट्रोजन के आक्साइड, फास्फोरस के अपररूप, फास्फीन, फास्फोरस के हेलाइड, सल्फ्यूरिक अम्ल आदि 17 पाठ को हटाया गया है। वहीं जीवविज्ञान में अनुवांशिक तथा विकास, मानव कल्याण में जीव विज्ञान, पारिस्थतिकी में जैव विविधता एवं संरक्षण आदि पाठ को कम किया गया है। गणित में द्विआधारी संक्रियाएं, मध्यमान प्रमेय, बेज प्रमेय आदि दस चैप्टर को पाठ्यक्रम से हटाया है।
कोरोना काल में स्कूल कम दिन ही संचालित हुए हैं। विषय समिति के विशेषज्ञों द्वारा बताए गए पाठ को हटाए गए हैं। कुछ विषय ऐसे जिनके सिलेबस कम हैं, उनमें कोई कटौती नहीं की गई हैं। आवश्यकतानुसार सभी विषयों से चैप्टर को कम किया गया है।

